डा. ब्रजेश कुमार मिश्र, चेयरमैन, कार्डियेक साइंसेज

Heart Disease: हृदय रोग के अंतर्गत हृदय और रक्तवाहिनियों को प्रभावित करने वाली कई तरह की बीमारियां आती हैं. इन में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और दिल की धड़कन का अनियमित होना शामिल हैं. हृदय रोग दुनिया में होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक है. पारंपरिक रूप से हृदय रोग को वृद्धों की बीमारी माना जाता था लेकिन आज की बदलती परिस्थितियों में इस में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. आज 30, 40 और 50 साल की उम्र के बीच भी लोगों को गंभीर कार्डियेक समस्याएं होने लगी हैं.

इस का कारण लोगों की बदलती जीवनशैली और मेटाबोलिक रिस्क फैक्टर हैं, जो आज के समय में आम होते जा रहे हैं. घंटों तक बैठ कर काम करने, क्रोनिक तनाव, गतिहीन जीवनशैली, अस्वस्थ आहार, नींद की कमी और बढ़ते मोटापे व डायबिटीज के कारण लोगों के कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

हृदय शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग है. यह शरीर के हर हिस्से में औक्सीजन और खून पहुंचाता है. हृदय रोग का मतलब कोई एक बीमारी नहीं है बल्कि यह अलगअलग बीमारियों का एक समूह है, जिन से हृदय की रक्तनलिकाएं, मांसपेशियां, वौल्व या इलैक्ट्रिकल सिस्टम प्रभावित होते हैं. सब से आम हृदय रोग कोरोनरी आर्टरी डिजीज है, जिस में हृदय को खून सप्लाई करने वाली आर्टरी संकरी या ब्लौक हो जाती हैं. दूसरी समस्याओं में हार्ट फेलियर, हृदय की धड़कन का अनियमित होना (एरिदमिया), वौल्व में गड़बड़ी, कार्डियोमायोपैथी और हृदय की जन्मजात गड़बड़ियां शामिल हैं.

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