Rahul Gandhi Indore: 1 - झूठ की गूंज लेकर आ रहे हैं, उनका नाम पप्पू है तो काम भी पप्पू जैसे करेंगे.
( मोहन यादव, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश )
2 - राहुल गाँधी तो खुद ही बूढ़े हो गए हैं, डोकरा हो गए हैं. वो काहे के जवान हैं. जेन जी और आज का पढ़ा लिखा युवा नरेन्द्र मोदी को ही नेता मानता है
( उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश )
3 - वे राजनीति के नाराज फूफा हैं. 60 - 70 साल तक ना छात्र दिखाई दिए ना ही गूंज सुनाई दी.
( शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री )
4 - राहुल गाँधी के कार्यक्रम को लोग वैसे ही देखने जाते हैं जैसे कोई सर्कस देखने जाता है.
( कैलाश विजयवर्गीय, वरिष्ठ मंत्री मध्यप्रदेश)
19 सितंबर को इंदौर में आयोजित होने जा रहे राहुल गाँधी के कार्यक्रम `छात्रों की गूंज` को लेकर इन और ऐसे छोटे बड़े भाजपा नेताओं की अग्रिम बौखलाहट की असल वजह क्या है, इसे समझना अब मुश्किल नहीं रह गया है. बात सिर्फ वोटों के नुकसान की नहीं है बल्कि राहुल गाँधी के मनुवाद पर हमलावर होने की ज्यादा है. राहुल की युवाओं में बढ़ती लोकप्रियता और स्वीकार्यता भी भगवा खेमे की अगली चिंता हो सकती है.
इसका उदाहरण इंदौर में ही देखने में आया जब राहुल गाँधी के जोरदार स्वागत की तैयारियों के बीच युवतियों ने अपनी हथेली पर मेहँदी से `वेलकम राहुल गाँधी` और `वेलकम रागा` लिखवाया. अलावा इसके 16 सितम्बर तक ही डेढ़ लाख के लगभग युवा इस कार्यक्रम के लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करा चुके थे. इसके साथ साथ भगवा खेमे की असल चिंता मनुवाद की बखिया उधड़ने की है. जिस पर युवा खासा अटेंशन दे रहा है. इसकी असल वजह धर्म और आध्यात्म से ताल्लुक रखती अपनी जिज्ञासाओं और सवालों के जबाब ढूँढना है जो जेन जी की परेशानी की बड़ी वजह हैं. आज की युवा पीढ़ी मानसिक गुलामी ढोने से वेवजह परहेज नहीं कर रही.
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