क्या आप के साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप कौन्फ्रेंस रूम में खड़े हो कर प्रेजेंटेशन दे रहे हैं. सामने बौस ,सीनियर्स और कोवर्कर्स बैठे हुए हैं. मीटिंग काफी महत्वपूर्ण है और आप के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई है. हथेलियां पसीने  से भीग रही है.

आप हाथों को किसी तरह पोंछने का प्रयास कर रहे हैं और घबड़ाहट  में आप के हाथों से नोट्स गिरतेगिरते बचता है. ऐसी परिस्थिति में न सिर्फ आप का आत्मविश्वास घटता है बल्कि देखने वाले पर आप के व्यक्तित्व को ले कर नकारात्मक प्रभाव भी  पड़ता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो अक्सर हमारे साथ होता है. यह स्ट्रेसफुल या तनावपूर्ण परिस्थितियों  की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है.

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