जाड़े के मौसम में बाज़ार में साग सब्जियों की भरमार लग जाती है, लेकिन इन सबमें सबसे अधिक फायदेमंद बथुआ साग है. इसे अमूमन सभी घरों में किसी न किसी रूप में पकाया और खाया जाता है. इसे कई बिमारियों को दूर करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है. एशिया समेत यह अमेरिका, यूरोप और औस्ट्रेलिया में भी पाया जाता है. इसके बारें में डायटीशियन जसलीन कौर कहती हैं कि असल में बथुआ एक ऐसा साग है जिसमें आयरन, मैग्नेसियम, फाइबर, विटामिन ए,सी और बी काम्प्लेक्स आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसलिए इसका सेवन जाड़े में अच्छा होता है. इसके फायदे निम्न है,

– इसमें पानी की मात्रा और फाइबर भी सबसे अधिक होता है. यही वजह है कि पाइल्स और कब्ज को भी       क्योर करती है.

– अधिकतर कैल्शियम के लिए हम दूध का सेवन करते है, जबकि बथुआ में 309 मिलीग्राम कैल्शियम     होता है.

– बथुए में अमीनों एसिड की मात्रा अधिक होने की वजह से यह नई कोशिकाओं को बनाने और उसे   रिपेयर  करने में मदद करती है.

– बथुए में कम मात्रा में कैलोरी होने की वजह से ये किसी के लिए भी फायदेमंद होता है. 100 ग्राम बथुए   में  सिर्फ 45 ग्राम कैलोरी होती है,

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– बथुआ के पत्ते मुंह के छाले को कम करती है.

– बथुए को पानी में उबालकर उसके पानी से सर धोने पर केशों में मोयास्चराइजर बढ़ती है और जू से भी   बालों को मुक्ति मिलती है.

– बथुआ दांत के कई प्रकार की समस्याओं से भी निजात दिलाती है, मसलन दांत दर्द, मुंह में दुर्गन्ध,   मसूड़ों की बीमारियां आदि.

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– जिन महिलाओं की मासिक धर्म के चक्र में समस्या आती है, उन्हें बथुआ के बीज का पाउडर, अदरक के   रस में मिलाकर लेने से फायदा मिलता है.

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– जिन्हें यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन या आर्थराइटिस की शिकायत है उनके लिए बथुआ के पत्ते का रस काफी   लाभकारी होता है.

इसके अलावा इस मौसम में बथुए को अपने भोजन में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है, मसलन बथुआ की रोटी जो खाने में स्वादिष्ट और न्यूट्रिशस होती है. बथुए का रायता, जिसमें बथुए को उबालकर पीस ले और दही में मिला लें. बथुए का साग, जो आम साग की तरह ही बनता है. बथुए का पराठा, बथुआ का रस आदि बहुत सारी विधियों से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

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