जातेजाते रुला गए सचिन
क्रिकेट के बेताज बादशाह और बड़ेबड़े गेंदबाजों के अपने बल्ले से छक्के छुड़ाने वाले लिटिल मास्टर सचिन रमेश तेंदुलकर ने 16 नवंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां टैस्ट मैच खेल कर इंटरनैशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया.  15 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टैस्ट मैच खेलने वाले सचिन के नाम आज रिकौर्डों का पहाड़ है. उन्होंने अपने 24 साल के कैरियर में टैस्ट मैचों में जहां 51 शतक और 68 अर्धशतक व 239 मैचों की पारियों में 53.78 की औसत से कुल 15,921 रन बनाए तो वहीं एकदिवसीय क्रिकेट मैच में 452 पारियों में 44.83 की औसत से 18,426 रन बनाने का रिकौर्ड है जिस में 463 मैचों में 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं.
हालांकि सचिन के जीवन में भी कई उतारचढ़ाव आए. कई बार ऐसा लगा कि वे टीम को हार से बचा लेंगे पर उस में वे खरे नहीं उतरे. एक दौर ऐसा
भी आया जब उन्हें आलोचनाओं से दोचार होना पड़ा. लेकिन सचिन ने साबित कर दिया कि चाहे कितनी भी मुश्किलों का दौर हो उस से घबराना नहीं चाहिए.
लिटिल मास्टर के लिए तो रिटायरमैंट एक न एक दिन आना ही था. लेकिन यह विदाई इतनी यादगार होगी, शायद खुद सचिन को भी इल्म न होगा. स्टेडियममेंमौजूद हर दर्शक की आंखें नम हो गईं जब सचिन ने 21 मिनट की स्पीच में अपने 24 साल के कैरियर को दर्शकों के सामने बयां किया. करोड़ों क्रिकेट प्रेमी उन की बात सुनते रहे.
इन सालों में न जाने कितने क्रिकेटर आएगए. किसी ने संन्यास ले लिया तो कोई खराब परफौरमैंस की वजह से टीम में जगह नहीं बना पाया और कोई मैच फिक्ंिसग में उलझ गया. मैचों में हारजीत का सिलसिला जारी रहा, धूम मचती रही पर एक चीज नहीं बदली और वह थी सचिन का क्रिकेट प्रेम. लेकिन यह महान खिलाड़ी अपने हुनर व मेहनत की बदौलत बुलंदियों को छूता गया. वे आने वाली पीढ़ी को
एक सीख जरूर दे गए कि अगर आत्मविश्वास, मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ कोई काम करो तो निश्चित ही एक न एक दिन कामयाबी मिलती है. क्रिकेट को अलविदा करने से उन की कमी तो क्रिकेट प्रेमियों को हमेशा खलेगी.
बहरहाल, सचिन की खेल उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने उन्हें ‘भारत रत्न’ देने का ऐलान किया है.

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