जैसे हमारे विचार होते हैं, कुछ हद तक हमारा तन और मन भी वैसी ही प्रतिक्रिया देता है. हमारे मन में यदि यह बात बैठ गई कि ठंड मुझे बिलकुल बरदाश्त नहीं होती तो तन भी वैसी ही प्रतिक्रिया करनी शुरू कर देगा. मेरी बड़ी बहन न्यूजर्सी में रहती हैं. अक्तूबर के महीने में शाम के समय उन के घर की खिड़की थोड़ी सी खुली रह गई तो उन की पीठ बिलकुल अकड़ गई.

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