नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करवा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वही किया है जो हिंदू राजाओं के साथ उन के ब्राह्मण सलाहकार किया करते थे. इतिहास में दर्ज है कि ज्यादातर राजा ब्राह्मणों की सिफारिश पर बनाए जाते थे. कुछ ही युद्धों में जीत कर या नीचे से जनता की इच्छा पर राजा बन पाते थे. नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भी पसंद हैं, यह औपचारिकता तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नहीं निभाने दी.

नरेंद्र मोदी ने अब तक केंद्र में काम नहीं किया. वे राज्य के मुख्यमंत्री चाहे हों पर वहां उन्होंने कोई क्रांतिकारी काम नहीं किया. उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भरोसा है तो इसलिए कि उन्होंने वर्ष 2002 में दिखा दिया था कि वे कैसे हिंदुओं का नाजायज पक्ष ले सकते हैं और राजनीतिक व कानूनी वार झेल सकते हैं. भारतीय जनता पार्टी के बहुत से समर्थकों को नरेंद्र मोदी अपने मुसलिम विरोध के कारण बेहद पसंद हैं. भारतीय जनता पार्टी के सभी केंद्रीय नेता सम झते हैं कि 20 प्रतिशत जनता से वैरभाव ले कर देश नहीं चलाया जा सकता. हिटलर भी यहूदियों का भारी नरसंहार कर के अपने को और जरमनी को पूर्ण विध्वंस से नहीं बचा सका था.

लालकृष्ण आडवाणी ने इस बार बेहद दम दिखाया है. उन्हें एहसास हो गया है कि विघटन की राजनीति देश को डुबो देगी. भारतीय जनता पार्टी के अंधभक्तों की मांग को लगातार अनदेखा कर उन्होंने एक तरह से राममंदिर, रथ यात्रा व बाबरी मसजिद को तुड़वाने के लिए अपने ऊपर लगे कलंकों को थोड़ा फीका किया है. भारतीय जनता पार्टी का हाल शिवाजी के बाद के सालों में मराठा राजाओं जैसा हो जाए तो कोई हैरानी नहीं जो पेशवाओं के कारण बुरी तरह हारे थे. महाराष्ट्र गंगाजमुनी हिंदू संस्कृति का क्षेत्र तो नहीं पर संस्कृतीकरण के लालच में मराठी नवब्राह्मण अपना पुराना नाटक दोहराने से बाज नहीं आते दिखते.

 

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