BJP Government: सरकार ने पिछले कुछ सालों से लोगों पर मुकदमे करने और उन्हें जेल में डालना शुरू कर दिया है कि उन के पास आय के स्रोतों से ज्यादा संपत्ति है. ये मामले पहले आय कर विभाग की शक्तियों में आते थे पर अब प्रिवैंशन औफ मनी लौंड्रिंग एक्ट, जो 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपाई सरकार ने बनाया था, में ले जाया जा रहा है और सरकार के विरोधियों के खिलाफ जम कर इन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में खनन के ठेके पाने वाले संजय छीमन के यहां छापे मार कर पैसा बरामद कर के की गई गिरफ्तारी पर जमानत दे दी क्योंकि ईडी यह नहीं दिखा पाई कि जो ज्यादा पैसा उसे छापों में मिला था वह किसी अपराध से जुड़ा है और अगर जुड़ा है तो कैसे.

रेड में पैसे पाना अपनेआप में एक गुनाह होना जरूरी नहीं है. यह आयकर बचाने का मामला हो सकता है जिस में पैनल्टी लगती है पर गिरफ्तारी पहले ही दिन नहीं होती. आयकर विभाग बहुत थोड़े से मामले में गिरफ्तारी की सिफारिश करता है.

पीएमएलए कानून में उन अपराधों को गिनाया गया है जो उस के दायरे में आते हैं और ईडी को केवल वे ही मामले लेने के हक हैं जो लिखे हुए अपराधों में आते हैं. सिर्फ यह कह देना कि अभियुक्त ने हिमालय में अवैध खनन की होगी और यह पैसा वहां से आया होगा, काफी नहीं है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला बिलकुल सही है. पीएमएलए का आजकल भरपूर दुरुपयोग हो रहा है और आमतौर पर, जज भी कईकई सप्ताह तक आरोपी को जेलों में बंद रहने देते हैं. केवल कुछ गवाहों के बयानों पर केस बना देना काफी नहीं है.

वैसे, इस मामले में पक्का है कि ईडी सुप्रीम कोर्ट जाएगी और तब तक सुप्रीम कोर्ट से आरोपी को जेल में रखने की मांग करेगी जब तक या तो सुप्रीम कोर्ट पूरी सुनवाई न कर ले या कोई राजनीतिक समझता न हो जाए.

इस में शक नहीं है कि देश में आज बुरी तरह आपाधापी मची हुईर् है और जो सरकार के निकट होता है, वह देखतेदेखते करोड़ों रुपए कमा लेता है. जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां तो कोई कुछ नहीं करता लेकिन जहां दूसरी पार्टियों की सरकारें हैं वहां तुरंत कुछ होने लगता है. उद्देश्य देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना नहीं है न. BJP Government

 

 

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