Discovery of the World: हजारों साल तक दुनिया के तमाम धर्म धरती को चपटी मानते रहे. कोई धर्म कहता कि धरती चटाई की तरह बिछाई गई है तो कोई इसे कछुए की पीठ पर रखा हुआ कहता था. आज से 500 साल पहले एक स्पैनिश बिजनेसमैन फर्डिनेंड मैगलन व्यापार के नए ठिकानों की तलाश में स्पेन से बाहर निकला और 4 साल समुद्र में भटकने के बाद जब उस का जहाज वापस स्पेन पहुंचा तब दुनिया चपटी नहीं रह गई थी. धर्म की मान्यताओं को तोड़ कर दुनिया को खोजने वाले इस पहले नाविक की मौत धर्म के कारण ही हुई.

फर्डिनेंड मैगलन की यात्रा की पूरी कहानी 10 अगस्त, 1519 को सेविले से शुरू हुई. स्पेन के राजा चार्ल्स प्रथम ने उसे 5 जहाज दिए थे, ट्रिनिडाड, सैन एंटोनियो, कंसेप्सियोन, विक्टोरिया और सैंटियागो. इन पर कुल 270 नाविक सवार थे. इस यात्रा का मकसद भारत जैसे दूसरे मसाला द्वीपों तक पश्चिम की ओर से नया रास्ता खोजना था. 20 सितंबर, 1519 को यह बेड़ा सैनलुकार डी बरमेडा से अटलांटिक में निकला. ब्राजील के किनारे होते हुए वह दक्षिण अमेरिका तक पहुंचा. वहीं सैन जूलियन की खाड़ी में सर्दी में फर्डिनेंड मैगलन के 3 कप्तानों ने विद्रोह कर दिया, जिसे मैगलन ने बेरहमी से कुचल दिया. इस के बाद जैसे ही यह बेड़ा आगे बढ़ा, फर्डिनेंड मैगलन का एक जहाज सैंटियागो तूफान में डूब गया.

21 अक्टूबर, 1520 को उन्हें दक्षिण अमेरिका के आखिर में एक टेढ़ामेढ़ा जलमार्ग मिला. 38 दिन तक उस अंधेरी, ठंडी खाड़ी में भटकने के बाद 28 नवंबर, 1520 को वे एक नए महासागर में निकले. मैगलन ने इसे प्रशांत महासागर नाम दिया क्योंकि यह बहुत शांत था और यही शांति उन की मौत बन गई.

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