Madhya Pradesh Chief Minister: भाजपा यह कहती नहीं अघाती कि उस के राज में कहीं भ्रष्टाचार नहीं है लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन घोटाले पर उठी उंगलियों ने इस दावे की पोल खोल दी है. भाजपा आलाकमान का आशीर्वाद उन्हें फिलहाल बचा ले गया है पर राम मंदिर घोटाले की प्रतिछाया कब क्या हो, कहा नहीं जा सकता. मुमकिन है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव और उन के परिजनों पर जमीन घोटाले के जो आरोप लगे हैं वे कल को आएगए हो जाएं. यह चर्चा आम रही कि इन घोटालों को उजागर करवाने में खुद भाजपाइयों और उन में भी खासतौर से शिवराज सिंह चौहान के खेमे का रोल अहम रहा.
देश की राजनीति का चरित्र अब महाभारत के युद्ध जैसा है जिस में सगे ही एकदूसरे के खिलाफ हो गए थे और एक परिवार की अंदरूनी लड़ाई आम जनता की कहानी बन गई. मुगल शासकों के इतिहास का भी असर लोगों के जेहन में है कि सत्ता कुरसी पर बैठे हुए को धकिया कर भी हासिल की जा सकती है, युद्धक्षेत्र में जाना जरूरी नहीं.
जब उजागर हुआ कथित घोटाला
यह हल्ला कोई गुल खिला पाएगा, ऐसा लग नहीं रहा क्योंकि जिस अंगरेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रैस’ ने इसे उठाया है उस ने आंकड़े भर दिए हैं. किसी बहुत बड़े घोटाले या गोलमाल का जिक्र नहीं किया है. जो भाजपाई पलटवार को पुख्ता करने वाली बात है कि मोहन यादव और उन का परिवार अरसे से जमीनों का कारोबार कर रहा है. ऐसे में अगर उन्होंने कुछ जमीनों की खरीदफरोख्त कर ली तो इस में घोटाला कहां से आ गया? जमीनें खरीदना कोई गुनाह तो नहीं?
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