राष्ट्रीयस्तर पर किसानों का नए कृषि कानूनों को ले कर खुला विरोध, कुछ करे न करे, यह जरूर एहसास दिला रहा है कि संसद में भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल सीटों के बल पर अपनी हर मनमानी पूरी नहीं कर सकती, लोकतंत्र में जनता की राय भी अहम होती है. यह और बात है कि सरकार तानाशाही पर उतारू हो आए और जनता की न सुने. रामायण, महाभारत और पुराण स्मृतियों को सुपर संविधान मानने वाली भाजपा सरकार आम जनता को नहीं, अपने मुनियों को बचाने में लगी है. कृषि कानूनों में बिना किसी सहमति के परिवर्तन करने से करोड़ों किसानों का भविष्य खतरे में चला गया है और अब उन्हें ब्रह्मवाक्य मान कर जनता के गले में उडे़ला जा रहा है.

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