अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी छिन्नभिन्न होती नजर आ रही है. 1984 की भाजपा की सदस्य संख्या 2 से दोगुने यानी 4 सदस्य लोकसभा पहुंचाने के बाद भी यह पार्टी शून्य की ओर जा रही है. इस का कारण ढूंढ़ना आसान है.

अरविंद केजरीवाल की लहर उस मध्यवर्ग की देन है जो दिल्ली की तत्कालीन कांगे्रस सरकार से बेहद नाराज था और भ्रष्टाचार से भरी व निकम्मेपन की आदर्श बनी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहता था. उसे 2 वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी में भी कोई आशा नजर नहीं आ रही थी. अरविंद केजरीवाल सामने आए तो उस वर्ग को एक खूंटा दिखा, जिस से बंध कर वह अपने विरोध का प्रदर्शन कर सके.

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