अब सरकारी अफसर कह रहा है कि कोई भी ठंड से नहीं मरता तो सही ही होना चाहिए. मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद राहत शिविरों में रह रहे लोगों में से कुछ के मरने पर एक अफसर का कहना था कि अगर ठंड से लोग मरते तो साइबेरिया में, जो रूस का बर्फ से ढका इलाका है, कोई जिंदा ही नहीं बचता.

इस अफसर के बयान पर हल्ला मचाया जा रहा है. सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी भी भौचक्की है और दूसरे दल मखौल उड़ा रहे हैं कि देखो कैसी सरकार और कैसे अफसर. वैसे सरकारी अफसर इस देश में पंडितों की तरह कभी गलत नहीं होते. तभी तो दोनों के आगे हाथ पसारे सैकड़ों खड़े रहते हैं. अब पंडित ने कहा कि शास्त्र के अनुसार शादी नहीं टिकेगी तो क्या टिकेगी? अगर उस ने कह डाला कि सुबह 4 बजे ही शुभ मुहूर्त है तो क्या 8 बजे का समय शुभ हो सकता है?

इस अफसर की आलोचना करने वाले देशद्रोही हैं, जैसे अंधविश्वासों की आलोचना करने वाले धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले होते हैं. उन का मुंह बंद रखना सरकार, कानून, अदालत, पुलिस का पहला काम है. क्या मालूम नहीं है?

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