वर्ष 1980 तक भारत के बराबर गरीब और दानेदाने को मुहताज चीन आज दुनिया की सब से ज्यादा ताकतवर हस्ती अमेरिका को चुनौती दे रहा है और वह भी बराबरी की हैसियत से. चीन 1960-70 का वियतनाम या 1990-2010 का उत्तरी कोरिया नहीं है कि जो अपने लोगों के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने को तैयार हो कर अमेरिका से मुकाबला करने को तैयार हुए. चीन तो रूस की तरह, या यों कहिए कि उस से भी कई कदम आगे चल कर, अमेरिका से मुकाबला कर रहा है. इस के मुकाबले भारत, चाहे गिड़गिड़ा न रहा हो, को मालूम है कि उस का एक पांव चाहे चांद पर पहुंचने को उतावला हो, दूसरा तो गोबर के गड्ढे में धंस ही रहा है.

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