मौसी, चाची, मामी, बूआ, भाभी, दीदी या फिर पड़ोस की आंटी के भड़कीले मेकअप को देख कर अकसर बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम वाली कहावत याद आ जाती है. मौसी के होंठों पर लाल गहरी लिपस्टिक देख बरबस हंसी छूट जाती है. थुलथुल शरीर वाली मामी जब पेंसिल हील वाली सैंडल पहन गिरतेसंभलते चलती हैं, कैसा दिलचस्प नजारा होता है. सांवली और मोटी चाची जब किसी समारोह में पीली गोटेदार साड़ी पहन कर पहुंचती हैं तो सरसों के खेत में भैंस की कल्पना को सच साबित कर जाती हैं. अपने कई महिला रिश्तेदारों का पहनावा और मेकअप देख खुद को शर्म आने लगती है, ऐसा गाहेबगाहे होता ही रहता है.

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