लेखक-अशोक शर्मा 

सौजन्या- सत्यकथा

30दिसंबर, 2020 सुबह के यही कोई साढ़े 7 बजे का समय था. कर्नाटक के शहर बेलगाम स्थित सिविल अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग की महिला सिक्युरिटी गार्ड सुधारानी वसप्पा हडपद अपनी सहयोगी गायत्री चिदानंद कलगढ के साथ अपनी नाइट ड्यूटी खत्म कर अस्पताल से बाहर निकली थी. तभी उन की नजर बाल चिकित्सा विभाग के पीछे एक मोटरसाइकिल की सीट पर बैठे इरन्ना बाबू जगजंपी के ऊपर पड़ी, जो सुधारानी वसप्पा हडपद की तरफ देख रहा था. वह इरन्ना बाबू जगजंपी को जानती थी.

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