बीती 24 जनवरी को पुत्रदा एकादशी का व्रत कई माओं ने रखा था जिससे उनकी संतानें सुखी रहें लेकिन एक माँ ऐसी भी थी जो व्रत रखने वाली महिलाओं से भी ज्यादा अन्धविश्वासी और  `धर्मपरायण` निकली . दो जवान बेटियों का धार्मिक अन्धविश्वास के नाम पर बेरहमी से क़त्ल कर देने वाली इस कुमाता का नाम पद्मजा है . हादसा दिल दहला देने बाला है जिसे जिसने भी सुना उसने सतयुग लाने वाली इस कलयुगी माँ की काली करतूत और थू थू की लेकिन अफ़सोस इस बात का ज्यादा होना चाहिए कि किसी ने उस धर्म और उसके पाखंडों व ग्रंथों और अंधविश्वासों को लानत नहीं भेजी जो इस मानसिकता और उन्माद का स्रोत और उद्गम है .

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