भोपाल का एक नौजवान प्रापर्टी ब्रोकर कैसे पुलिस वालों के हाथों मारा गया और क्यों उसके खाकी वर्दी वाले हत्यारों का कुछ नहीं बिगड़ेगा. इसे समझने में लगभग 2 साल पीछे भोपाल से 350 किलोमीटर दूर मंदसौर का रुख करना जरूरी है, जिससे आसानी से समझ आए कि कानून के हों न हों, लेकिन पुलिस वालों के हाथ वाकई लंबे होते हैं.

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