Inspirational Story: घर, पति, बच्चे, क्या एक स्त्री का वजूद इन्हीं से है? उस का खुद का आत्मसम्मान, व्यक्तित्व, अधिकार कुछ नहीं. शादी के 25 साल बाद सीता आज खुद को तलाश रही थी और इन्हीं ‘देखो, आखिरकार यह सीता सुंदरी वैडिंग रिजौर्ट तैयार हो ही गया,’ संजय ने उसे देखते हुए गर्व से कहा था, ‘अब तुम इस की मालकिन हो और इसे तुम्हें ही संचालित करना है.’ वह हंस कर रह गई थी. ठीक ही है. अब वह इसी बहाने व्यस्त रहेगी.
21 वर्ष की आयु में ही उन की शादी हो गई थी. रांची में मायका व्यापारिक था तो जमशेदपुर में ससुराल उस से भी बड़ा बिजनैस साम्राज्य वाला था. ऐसे में बच्चे कब हुए, बड़े हो कर पंखदार बने और उड़ चले, यह पता ही न चला. बड़े बेटे को अमेरिका जाने का शौक था. सो, वह उधर मैनेजमैंट की पढ़ाई करने अमेरिका क्या गया, वहीं का हो कर रह गया. दूसरे बेटे ने चार्टर्ड अकांउटैंसी पढ़तेपढ़ते अपना अलग बिजनैस मुंबई में खड़ा कर लिया था. बेटी अपनी ससुराल जा बसी थी.
उसे लगा कि अब उसे चैन मिलेगा. मगर चैन कहां था.
आरंभ से ही उस ने अपने पति संजयजी को कभी स्थिर नहीं देखा. उन के जमाजोड़ में हमेशा बिजनैस व व्यापार समाहित था. इतनी बड़ी प्रौपर्टी के मालिक होते हुए भी उन्हें चैन नहीं था. इस आदमी के पीछे उस ने अपनी सोने सी जिंदगी स्वाहा कर दी. दिन को दिन नहीं और रात को रात नहीं समझ और वे रुपए कमाने के लिए आजीवन भागते फिरे. इतना सारा रुपया कमाने और तमाम तामझाम बटोरने के बावजूद उन्हें चैन नहीं था. सातसात शहरों में मकान और 2 फ्लैट हैं इन के. उसी हिसाब से बिजनैस भी फैला हुआ है. फिर भी उस ने कोई शिकायत नहीं की.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





