Gen Z Culture: ईरान और अमेरिका-इजराइल वार ने एक बात तो फिर प्रूव कर दी कि जेनजी सोशल मीडिया पर चाहे जितना डिपैंड हो कर लाइफ के फुलफिलमैंट को माने, आखिर में सौलिड चीजें ही काम में आती हैं. नेपाल में जेनजी तब भड़की थी जब पिछली सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफौर्म बैन किए थे और उस ने जेनजी इन्फ्लुएंसरों की सरकार भी अब बना ली लेकिन ईरान और अमेरिकाइजराइल वार ने तेल की कमी पैदा कर और शिप्स को रोक कर जता दिया कि जिंदगी मैसेजों से नहीं चलेगी, सौलिड चीजों से चलेगी.
जेनजी सोशल मीडिया के ओशियन में इस कदर डूबी थी कि उसे मालूम ही नहीं था कि उस का खाना, पानी, बिजली, टैलीकौम सर्विसेस छोटे से मोबाइल से नहीं निकलते बल्कि बड़ी फैक्ट्रियों से आते हैं और वे बंद हो गईं तो सोशल मीडिया मरे चूहे की तरह रह जाएगा. डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आज मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) एक्टिविस्ट्स की देन है जो या तो अपनी नौलेज चर्च के सरमन से लेते हैं या सोशल मीडिया से. उन के पास सोशल मीडिया भी दूसरे मागा ही भेजते हैं. सोशल मीडिया का एल्गोरिदम ऐसा है कि आप को यह वही बात बारबार बताएगा.
अगर अमेरिकियों ने ट्रंप के प्रवचन सोशल मीडिया पर सुन कर कि ‘ईरान के पास एटमबम हैं’ और इसे दोतीन बार कहीं कुछ देख लिया तो सैकड़ों मैसेजेज, रील्स, यूट्यूब क्लिप इस तरह के टपकने लगेंगे कि ईरान तो जैसे तेलअवीव पर आज ही एटमबम फोड़ने वाला है. सोशल मीडिया जंगल में घुमावदार रास्ते बनाता है और लोग एक की पहाड़ के घने जंगल में सर्कलिंग कर के निकलने की कोशिश करने के दौरान सोचने लगते हैं कि बस यही दुनिया है. 20-25 दिन औयल कम मिला, गैस नहीं मिली, मैटल्स नहीं मिले कि सारी दुनिया की टैक कंपनियों की हेकड़ी और एरोगैंस फटाक से गिर पड़े. सब को पता चल गया कि इन सौलिड चीजों की कमी का क्या मतलब है.
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