पहली अप्रैल, 2017 की बात है. दिल्ली पुलिस के दक्षिणीपूर्वी जिले के इंचार्ज राजेंद्र कुमार अपने औफिस में सबइंसपेक्टर प्रवेश कसाना और अजय कटेवा से एक केस के बारे में विचारविमर्श कर रहे थे, तभी एक पुराना मुखबिर उन के पास आ पहुंचा. वह उन का विश्वसनीय मुखबिर था. वह जब भी आता था, कोई न कोई नई जानकारी लाता था. इसलिए उसे देखते ही इंसपेक्टर राजेंद्र कुमार ने उसे कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए पूछा, ‘‘कहिए, क्या नई खबर है?’’

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