बैंक ऋण वसूली के लिए नियमों को और कड़ा बनाने के वास्ते माथापच्ची कर रहे हैं. रिजर्व बैंक तथा केंद्र सरकार के बीच वसूली को सुनिश्चित बनाने के लिए कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं. फिलहाल इस का ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. वित्तमंत्री ने स्थिति का ठोस परिणाम सामने आते नहीं देखा तो उन्होंने एक समिति का गठन कर दिया. यह समिति पता लगाएगी कि जो लोग क्षमता होते हुए भी ऋण लौटाने से कतराते हैं उन लोगों से किस तरह से ऋण वसूला जाए. समिति ऋण वसूली के मुद्दे पर गंभीरता से विविध नजरिए से विचार कर रही है. रिजर्व बैंक ने बैंकों से कह दिया है कि जो लोग ऋण लौटाने में कोताही बरत रहे हैं उन्हें अतिरिक्त ऋण नहीं दिया जाए. ऋण वसूली के लिए समिति के समक्ष जो भी सुझाव आएंगे उन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा. यह कदम बैंकों में निरंतर बढ़ रही गैर निस्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए के स्तर को संतुलित बनाने के लिए भी उठाया गया है. बैंकों में समाप्त वित्त वर्ष तक एनपीए का स्तर पिछले वर्ष के 3.84 प्रतिशत से बढ़ कर 4.72 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है. बैंकों का कहना है कि उन्हें ऋण वसूली के लिए अधिकार दिए जाने चाहिए. बैंकों के पास इस के लिए फिलहाल कोई अधिकार नहीं हैं और जो हैं वे बहुत प्रभावी नहीं हैं. बैंकों का कहना है कि यदि उन्हें ऋण वसूली पर सख्ती का अधिकार मिलता है तो एनपीए का स्तर घटाया जा सकता है और ऋण वसूली को बढ़ाया जा सकता है.

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