Widow Pension Law India: आज वह जमाना नहीं है जब पति की मौत के बाद औरत को जिंदगीभर विधवा बन कर जिंदगी गुजारनी पड़ती थी. कौंस्टिट्यूशन ने विधवा औरतों को आजादी और बराबरी का दर्जा दिया जिस से आज के समय विधवाओं को आजीवन नर्क जैसी जिंदगी नहीं जीनी पड़ती. पति की मौत के बाद वह चाहे तो अपनी मरजी से दूसरी शादी कर सकती है. अगर पति सरकारी कर्मचारी है तो उस की मौत के बाद उस की पत्नी को पैंशन मिलती है जिस से उस का गुजारा चल सके लेकिन सवाल यह है कि गवर्नमैंट एम्प्लौई की मौत के बाद अगर उस की विधवा दूसरी शादी कर ले तो क्या यह पैंशन उसे मिलती रहेगी?

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक जवान की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी. जवान की मौत के बाद उस की पत्नी को पैंशन मिलनी शुरू हुई. बाद में जवान की विधवा ने शादी कर ली. मृतक जवान के मातापिता ने औरत को मिलने वाली पैंशन पर दावा ठोक दिया. मातापिता का तर्क था कि बेटे की विधवा की दूसरी शादी के बाद उसे पैंशन का हक नहीं रहना चाहिए और आश्रित मातापिता होने के नाते उन्हें यह पैंशन दी जानी चाहिए. इसी आधार पर मातापिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी.

हाईकोर्ट ने केंद्रीय सिविल सेवा 1972 के नियम 54 को इस मामले में सही ठहराते हुए कहा कि यह नियम विधवाओं के पुनर्विवाह को बढ़ावा देने और उन के लिए सोशल सिक्योरिटी तय करने के मकसद से बनाया गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इन तमाम दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि पारिवारिक पैंशन कोई विरासत नहीं है बल्कि यह एक कानूनी सामाजिक सुरक्षा इंतजाम है जो केवल पैंशन के नियमों के तहत ही दी जाती है. नियम 54 के तहत पैंशन पाने वालों की प्राथमिकता तय है. मरने वाले कर्मचारी के मातापिता तब तक पैंशन के पात्र नहीं होते जब तक मरने वाले की पत्नी जीवित है, इस से फर्क नहीं पड़ता कि उस ने पुनर्विवाह कर लिया.

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