Youth Movie Review: ग्रीक माइथोलौजी में महत्त्वाकांक्षा और लापरवाही के बारे में इकारस की एक कहानी है. इकारस, डेडलस का बेटा था, जो शहर का शानदार कारीगर और आविष्कारक था. दोनों को क्रीट द्वीप के राजा किंग माइनस ने कैद कर लिया था. वहां से भागने के लिए डेडलस ने एक अनोखा तरीका निकाला, उस ने पंख और मोम से दो जोड़ी पंख बनाए, ताकि वे उड़ कर भाग सकें. उड़ान से पहले डेडलस ने इकारस को सख्त चेतावनी दी.
पहली, बहुत नीचे मत उड़ना वरना समुद्र की नमी पंखों को भारी कर देगी. दूसरी, बहुत ऊपर भी मत उड़ना वरना सूरज की गरमी मोम को पिघला देगी. लेकिन उड़ते समय इकारस एक्साइटेड हो गया. वह चेतावनी भूल गया और ऊंचा, और ऊंचा उड़ता चला गया, सूरज के नजदीक. हुआ यह कि उस के पंख पिघलने शुरू हो गए और वह गिर कर समुद्र में डूब गया.
फिल्म ‘यूथ’ इकारस की तरह समुद्र और सूरज के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है, मगर हिचकोले खाती रहती है. फिल्म पूरी तरह अपने मकसद में डूब गई
है, ऐसा नहीं कहा जा सकता पर जो कहने की कोशिश करती है वह नया भी नहीं है. कहानी का नायक प्रवीन (केन करुनस) एक टीनऐज लड़का है. उस का पढ़ाई में मन
नहीं लगता. 10वीं के बोर्ड एग्जाम में मुश्किल से पास हुआ है. उस की लाइफ की एक समस्या है कि उसे कोई लड़की भाव नहीं देती.
उस की मां सरोजा (देवदर्शिनी) उसे खूब लाड़प्यार करती है. वहीं उस का बाप (सूरज) उसे निकम्मा समझता है, दोनों बाप बेटे में बनती नहीं है. परिवार फाइनैंशियली कमजोर है. प्रवीण का अपनी लाइफ को ले कर कोई गोल नहीं है. उसे बस अपनी लाइफ में प्यार की तलाश है. वह स्कूल में ज्यादातर समय अपने 4 दोस्तों के साथ मिल कर टपोरीगीरी करता
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