नारी सशक्तिकरण के नाम पर देश में केंद्र और राज्य सरकारों की कई योजनाएं लागू हैं. इसके बावजूद पूरे देश में लड़कियों के मामले में सबसे पिछड़ा राज्य हरियाणा ही माना जाता है. 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में हजार लड़कों के बीच सिर्फ 762 लड़कियां थी. लेकिन पिछले पांच वर्ष के अंदर ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ तथा ‘‘लाड़ली’’ योजना लागू होने के बाद 2018 के आंकड़ों के अनुसार अभी भी हरियाणा में हजार लड़कों के बीच महज 834 लड़कियां हैं.

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इतना ही नहीं हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां लड़कियों पर सर्वाधिक पाबंदियां हैं. खेलकूद से कला जगत में भी सबसे कम लड़कियां हरियाणा की हैं. मगर लड़कियों के विकास और उनकी उन्नति के नाम पर हरियाणवी फिल्म ‘‘छोरियां छोरों से कम नहीं’’ का निर्माण व उसमें अभिनय करने वाले बौलीवुड के मशहूर अभिनेता व निर्देशक सतीश कौशिक की हरियाणा की लड़कियों को लेकर अलग ही राय है. वह कहते हैं-

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‘‘जी नहीं..ऐसा कुछ नही है. हरियाणा के रोहतक में ‘हरियाणा फिल्म इंस्टीट्यूट’ बना हुआ है. हमारी फिल्म में हरियाणा की विधि जायसवाल ने काम किया. गीता फोगाट व बबिता फोगाट खेल के मैदान में हरियाण का नाम रोशन कर चुकी हैं. हरियाणा की लड़की बलजिंदर कौर को फिल्म ‘पगड़ी’ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल अवार्ड मिल चुका है. हरियाणा में तो लड़कियां बहुत काम कर रही हैं. अभी मैंने अपनी हिंदी फिल्म ‘कागज’ की शूटिंग हरियाणा की झज्जर में की. इस हिंदी फिल्म में लोग हरियाणवी बोलते हैं. उसमें हरियाणा की तमाम लड़कियों ने काम किया है. फिल्म ‘सूरमा’ में भी हरियाणा की लड़की थी. 20-25 साल पहले लोग अपनी लड़कियों को काम करने से रोकते थे. लेकिन आज फिल्म उद्योग बहुत ही इज्जतदार प्रोफेशन है. यहां लोग पैसे कमा रहे हैं. पूरे दुनिया में बौलीवुड का नाम है. देखिए, क्रिएटिव होना या सपने देखना, हर इंसान का हक है. हमारी फिल्म ‘छोरियां छोरों से कम नहीं’ भी लड़कियों से यही कहती है कि आप सपने देखिए. जब तक सपना नहीं देखोगी, तब तक कुछ नहीं कर सकते. मैं हरियाणा की हर लड़की को यही सिखाना चाहता हूं कि वह सपना देखें, आगे बढ़े. ’’

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