नवाजुद्दीन सिद्दिकी इन दिनों ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ से काफी खफा हैं. उनकी फिल्म ‘‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’’ को ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ द्वारा 48 कट दिया जाना उन्हे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला लग रहा है. इसलिए जब हाल ही में मुलाकात होने पर हमने उनसे पूछा कि इन दिनों लोग शिकायत कर रहे हैं कि अभिव्यक्ति  की आजादी खत्म हो गई है. इस पर वह खुद क्या सोचते हैं.

इस पर नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने कहा -‘‘हर क्षेत्र के जानकार अपने हिसाब से बात कर रहे हैं. मैं तो अपने क्षेत्र की बात कर सकता हूं. मसलन,हमारी फिल्म ‘‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’’ को सेंसर बोर्ड ने कट लगाए हैं. मैं सरकार से, सेंसर बोर्ड से कहता हूं कि हमें रचनात्मक आजादी दो. हमारी इस आजादी पर कट मत लगाइए. आप फिल्म को प्रमाणित करते हैं, तो फिल्म को एडल्ट प्रमाणपत्र दे दें. एडल्ट फिल्म का प्रमाणपत्र देने के बाद भी कट लगाएं, वह गलत है. हमें वह आजादी चाहिए. सच यह है कि हमारे साथ कई निर्माता खड़े हैं. हम सभी चाहते हैं कि सेंसर बोर्ड की गाइड लाइन्स बदली जाए. हम चाहते हैं कि श्याम बेनेगल कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार किया जाए. हमें उसका इंतजार है.’’

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