2017 की स्पैनिश फिल्म ‘‘द इनविजिबल गेस्ट’’ की हिंदी रीमेक फिल्म ‘‘बदला’’ एक बेहतरीन पटकथा पर बनी फिल्म होते हुए भी आम दर्शकों के लिए नहीं है. इस फिल्म में 2016 की सफल फिल्म ‘पिंक’ की जोड़ी अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में हैं. अपराध, रहस्य व रोमांचक फिल्म का निर्माण करना सदैव बहुत कठिन होता है, मगर फिल्मकार सुजाय घोष एक बेहतरीन फिल्म बनाने में कामाब रहे हैं.

फिल्म की कहानी फ्रांस की है, जहां नैना सेठी(तापसी पन्नू) एक सफल बिजनेस वूमेन है.परिवार में उसके पति सुनिल व बेटी है. पर फोटोग्राफर अर्जुन(टोनी लुक) के साथ उसके अवैध संबंध है. कहानी शुरू होती है नैना पर अर्जुन की हत्या का आरोप लगने से. नैना की गिरफ्तारी हो जाती है. पर वकील जिम्मी(मानव कौल) किसी तरह नैना को जमानत पर छुड़ा लेता है. मगर अदालत में वे बाइज्जत बरी हो जाए, इसके लिए जिम्मी की सलाह पर नैना एडवोकेट बादल गुप्ता(अमिताभ बच्चन) की मदद लेती हैं और बादल गुप्ता, नैना से मिलने तय समय से पहले ही पहुंच जाते हैं. फिर बादल गुप्ता, नैना से कहते हैं कि वे सब कुछ उन्हें सच सच बताएं. नैना कहानी बताना शुरू करती हैं. नैना की कहानी के दो रूप सामने आते हैं. बहरहाल नैना की कहानी शुरू होती है अर्जुन के साथ एक शहर में कुछ दिन बिताने के बाद वापसी से.

जब नैना सेठी व अर्जुन वापस आ रहे होते हैं,तो रास्ते में एक कार से उनकी कार की टक्कर हो जाती है. पता चलता है कि उस कार को चला रहे युवक सनी सिंह की मौत हो गयी है. पर वह इसकी सूचना पुलिस को नहीं देते. नैना,सनी को उसी की कार की डिक्की में डालने के बाद उसकी कार को ले जाकर नदी में डुबा देती है. जबकि नैना की कार को अर्जुन लेकर आगे बढ़ना चाहता है, पर कार बंद हो चुकी है. पीछे से आ रही एक कार रूकती है, जिसमें निर्मल सिंह और उनकी पत्नी रानी कौर(अमृता सिंह) हैं. यूं तो दोनो बहुत अच्छे अभिनेता हैं. मगर निर्मल सिंह एक होटल में नौकरी करते हैं और वह बहुत अच्छे मैकेनिक हैं. रानी कौर के कहने पर निर्मल,नैना की कार को अपनी गाड़ी के साथ अपने घर ले जाते हैं. जहां पर वह उनकी कार को ठीक कर देते हैं.रानी कौर के घर से विदा लेने से पहले अर्जुन को सनी का मोबाइल रानी को देना पड़ता है. फिर नैना व अर्जुन मिलते हैं और अपने अपने घर चले जाते हैं. नैना अपने बिजनेस में मग्न हो जाती है. पर सनी के न मिलने से सनी की मां रानी कौर उसकी तलाश शुरू करती हैं. रानी कौर पुलिस की मदद लेती हैं. और शक अर्जुन से होते हुए नैना पर जाता है. रानी कौर ने जो हुलिया बताया उससे पुलिस ने अर्जुन का स्केच बनवा लिया है. पर पूछताछ में नैना व उनके वकील जिम्मी यह साबित कर देते हैं कि नैना उस दिन पेरिस में थी. उसकी कार किसी ने चुरा ली थी. कार में मौजूद इंसान अर्जुन को वह नही पहचानती. उसके बाद नैना अपने बिजनेस व परिवार में मग्न हो जाती है. नैना की कंपनी जापान की एक कंपनी के साथ समझौता करके एशिया की सबसे बड़ी कंपनी बन जाती है. इधर रानी कौर को पुलिस पर यकीन नहीं होता और वह नैना का पीछा करना शुरू कर देती हैं.

इधर नैना को पुरस्कार मिलता है. जिस दिन नैना को पुरस्कार मिलता है, उसी दिन पुरस्कार वितरण के बाद चल रही पार्टी में रानी कौर,नैना से मिलती है और उससे कहती है कि वह बताए कि उसका बेटा सनी कहां है? रानी कौर बहाने से नैना से लाइटर मांगती है, यह वही लाइटर होता है जिसे रानी कौर को अर्जुन ने अपनी बहन का लाइटर बताया था. रानी कौर उस लाइटर को पानी में  फेक देती है और नैना से कहती है कि उसे पता है कि तुम बहुत ताकतवर हो पर ताकतवर लोग भूल जाते हैं कि सच छिप नहीं सकता.रानी कौर उसे चुनौती देकर चली जाती है.

उसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं. एक तरफ रानी कौर अपने बेटे सनी का सच जानने के लिए चालें चल रही है तो दूसरी तरफ नैना अपने आपको बचाने के लिए चालें चलती है. इतना ही नही खुद को बचाने के लिए नैना अर्जुन का कत्ल कर सारा आरोप रानी कौर व उनके पति निर्मल पर लगाने की भूमिका बना चुकी होती हैं पर वह बादल गुप्ता के सामने सच स्वीकार कर चुकी होती है. इस आस में कि बादल गुप्ता तो उसे बाइज्जत बरी करा ही देंगे.पर सारा सच जानने के बाद बादल गुप्ता चले जाते हैं और फिर जब दुबारा दरवाजे की घंटी बजती है तो पता चलता है कि एडवोकेट बादल तो अब आए हैं इससे पहले एडवोकेट बादल का रूप धर कर खुद निर्मल आए थे और वह जिस पेन से लिखने का नाटक कर रहे थे उस पेन से सारा सबूत नैना की आवाज में रानी कौर के पास रिकार्ड हो रहा था.रानी कौर ने पुलिस को फोन भी कर दिया.

फिल्म ‘‘बादल’ ’की सबसे बड़ी खासियत इसकी कसी हुई पटकथा है. लेखक ने बहुत ही चतुराई से इसके दृष्यों को रचा है.बतौर निर्देषक सुजाय घोष अपनी छाप छोड़ जाते हैं. मगर सत्तर प्रतिशत फिल्म अपराध को छिपाने के लिए र्सिफ देा पात्रों के बीच बातचीत पर है जिसके चलते फिल्म काफी शुष्क हो जाती है.‘‘बादल’’ उन दर्शकों के सिर के उपर से गुजरती है, जो अपना दिमाग घर पर रखकर महज मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाते हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो ‘पिंक’, ‘मुल्क’ व ‘मनमर्जियां’ के बाद एक बार फिर तापसी पन्नू ने नैना के किरदार में जानदार अभिनय किया है. अमिताभ बच्चन तो महान कलाकार हैं. उनके अभिनय का करिश्मा अपना जादू जगा ही जाता है. छोटी सी भूमिका में मानव कौल भी अपनी छाप छोड़ जाते हैं. अर्जुन के किरदार में टोनी लुक के पास करने को कुछ खास है ही नहीं. वैसे यह पूरी फिल्म नैना यानी कि तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन यानी कि बादल गुप्ता पर ही केंद्रित है. लेकिन अमृता सिंह अपने अभिनय से लोगों के दिलो दिमाग में अपनी छाप अंकित कर जाती हैं.

स्कौटलैंड में फिल्मायी गयी इस फिल्म के कैमरामैन अनिक मुखोपाध्याय की भी तारीफ की ही जानी चाहिए उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य को भी अपने कैमरे में कैद किया है.

दो घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘‘बदला’’ का निर्माण गौरी खान, सुनीर खेत्रपाल, अक्षय पुरी व गौरव वर्मा ने किया है. फिल्म के निर्देशक व लेखक सुजाय घोष और राज वसंत, कहानीकार ओरीओल पौलो, संगीतकार अनुपम रौय, अमाल मलिक, क्लिंटन सिरीजो,  कैमरामैन अनिक मुखोपाध्याय व कलाकार हैं- अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह, टोनी लुक व अन्य.

रेटिंग: तीन स्टार

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