2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में हुई बारिश की तबाही की पृष्ठभूमि पर अभिषेक कपूर एक प्रेम प्रधान फिल्म ‘‘केदारनाथ’’ लेकर आए हैं. कमजोर कहानी,अति कमजोर पटकथा व घटिया निर्देशन के चलते यह एक अति सामान्य प्रेम कहानी वाली फिल्म बन कर रह गयी है. जिसमें न इश्क की गहराई है और न ही केदारनाथ की त्रासदी का दर्द ही है. अफसोस की बात है कि हम 2018 में यानी कि इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं, मगर लेखक व निर्देशक ने जिस तरह के घटनाक्रम रचे हैं, वह साठ व सत्तर का दशक याद दिलाते हैं.

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