Lapata Ladies : आमिर खान की फिल्म ‘लापता लैडीज’ औस्कर से बाहर हो गई है. फिल्म औस्कर में भेजे जाने को ले कर पहले ही विवादों में थी. इस ने इंडस्ट्री में फेवरिज्म की बहस छेड़ी थी.

औस्कर की दौड़ से आमिर खान निर्मित और आमिर खान की पूर्व पत्नी किरण राव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘लापता लैडीज’ ( Lapata Ladies) के बाहर होते ही एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है. एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि आखिर ‘फिल्म फेडरेशन औफ इंडिया’ हर साल क्यों गलत फिल्म ‘औस्कर’ यानी कि ‘अकादमी औफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर श्रेणी के लिए भारत की तरफ से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजने की गलती कर भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर पहचान नहीं बनाने देना चाहता?

यह सवाल काफी गंभीर और चुनौतीपूर्ण होने के साथ ही इस बार की चयन समिति के अध्यक्ष व असमिया फिल्मकार जाहनु बारूआ को भी कटघरे में खड़ा करता है. आरोप तो यह भी लग रहा है कि इस बार ‘फिल्म फेडरेशन औफ इंडिया’ के अध्यक्ष व औस्कर के लिए भारतीय फिल्म की चयन समिति के अध्यक्ष जाहनु बरूआ सरकार के हाथ की कठपुतली बने होने के साथसाथ मिस्टर परफैक्शनिस्ट के रूप में मशहूर अति दंभी कलाकार व निर्माता आमिर खान के दबाव में थे.

अन्यथा वह ऐसी फिल्म यानी कि लापता लैडीज ( Lapata Ladies)  का चयन ही न करते जिस पर चोरी का आरोप लगने के साथ ही जिसे उन अंग्रेजीदां लोगों द्वारा बनाया गया हो, जिन्होंने कभी भारत के गांव देखे ही नहीं हैं.

औस्कर के लिए फिल्म के चयन की प्रक्रिया

औस्कर के लिए भारतीय फिल्म उद्योग की तरफ से फिल्म को भेजने का काम ‘फिल्म फेडरेशन औफ इंडिया’ की एक चयन समिति करती है. हर साल नई समिति का गठन एक अध्यक्ष के साथ किया जाता है. इस बार इस समिति के अध्यक्ष असमिया फिल्मकार जाहनु बरूआ थे. जिन फिल्मकारों को अपनी फिल्म औस्कर में भेजना होता है, उन्हें फिल्म फेडरेशन औफ इंडिया की इसी समिति के सामने आवेदन करना होता है.
उन में से एक फिल्म का चयन यह समिति करती है. हर साल इस समिति के कार्यकलापों पर उंगली उठती ही रहती हैं. इस बार समित के पास भारत में अवार्ड लेने से दूरी बना कर रखने वाले अति महत्वाकांक्षी व घमंडी आमिर खान लगभग हर साल अपनी फिल्म भेजने की प्रयास करते रहे हैं.

2001 में उन की फिल्म ‘लगान’ गई थी, जो कि बुरी तरह से मात खा गई थी. तो इस बार आमिर खान की फिल्म ‘लापता लैडीज’ के साथ ही कांस में पुरस्कृत पायल कपाड़िया की फिल्म ‘आल वी इमेजिन एज लाइट’, दक्षिण की फिल्म ‘महाराजा’ सहित 29 फिल्में थी.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

25% की बचत

डिजिटल

USD99 USD49 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
Best Value - 26% की बचत

24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल

USD200 USD149 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • 24 प्रिंट मैगजीन + डिजिटल एक्सेस + ऐप
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...