जिन के मन में लगन हो, क्रिएटीविटी भी और कुछ नया करने की इच्छा भी, वे किसी न किसी माध्यम से देश दुनिया के लोगों तक अपनी बात पहुंचा ही देते हैं. स्विएडा, सीरिया की रहने वाली 20 वर्षीय बैले डांसर और जिमनास्ट यारा खुदैर ऐसे ही लोगों में हैं. 7 साल पहले जब सीरिया में हर जगह तबाही के मंजर नजर आते थे, तब यारा 13 साल की थी. कह सकते हैं कि यारा खुदैर तबाही के मंजर देखतेदेखते किशोरावस्था से जवान हुईं. इसी बीच उन्होंने बैले डांस और जिमनास्टिक सीखा.

यारा खुदैर सीरिया में आतंकी हमलों से तबाह हुए स्कूलों, प्राचीन जगहों और ऐतिहासिक थिएटर में बैले डांस कर के लोगों को फिट और खुश रहने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं. अपने ढंग से शांति का संदेश देने वाली इस बाला का मकसद तबाह हुए सीरिया की संस्कृति को बचाना है.

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सीरिया को ले कर दुनिया भर के लोगों में निगेटिवटी फैली है, हमारी पीढ़ी को उस निगेटिविटी को खत्म करना है. यारा जब किसी स्कूल में अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं तो बच्चों को बहुत अच्छा लगता है और वे बहुत खुश होते हैं. वे भी डांस सीखना चाहते हैं. सारा का मकसद भी यही है, क्योंकि डांस की ज्यादातर विधाओं की नींव खुशी और उत्साह दर्शाने के लिए ही रखी गई है.

सारा कहती हैं, ‘मैं चाहती हूं कि बच्चे और किशोर कला से जुड़ें, उन में आत्मविश्वास पैदा हो ताकि वे सीरिया को फिर से खड़ा कर सकें.’ यारा को आतंकवादियों की धमकी मिलती रहती थीं, लेकिन वह इस से नहीं डरती थीं.

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अब सीरिया आईएस से मुक्त हो चुका है. आईएस के आखिरी 2500 लड़कों ने भी सरेंडर कर दिया है, इसलिए यारा को अब कोई डर नहीं.

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