Painful Urination: पेशाब की जलन अकसर जानलेवा नहीं होती लेकिन जानलेवा से कम भी नहीं होती. यह जिसे होती है वही इस की दुश्वारियां समझ सकता है खासतौर से महिलाएं जो झिझक और शर्म के चलते इलाज में देरी करती हैं. इस से जुडी बीमारियां अकसर गंभीर भी हो जाती हैं. इस वजह एक नहीं, बल्कि कई होती हैं.

हर किसी को कभी न कभी पेशाब की जलन की परेशानी, जिसे पेनफुल यूरिनेटिंग भी कहते हैं, से हो कर गुजरना ही पड़ता है. अकसर यह समस्या अस्थाई होती है लेकिन लगातार बनी रहे तो ध्यान देना और डाक्टर के पास जाना जरूरी हो जाता है. पेशाब की जलन की एक नहीं बल्कि कई वजहें होती हैं. महिलाओं में खासतौर से यह समस्या ज्यादा होती है क्योंकि उन की मूत्रनली यानी यूरेथ्रा पुरुषों की मूत्रनली (20 सेमी) के मुकाबले काफी छोटी लगभग (4 सेमी) ही होती है.

इस छोटी मूत्रनली का पेशाब की जलन से गहरा संबंध है जिस के चलते इस में बैक्टीरिया जल्दी दाखिल हो जाते हैं जिन्हें वहां पनपने के मौके ज्यादा मिलते हैं. यही बैक्टीरिया पेशाब की जलन की बड़ी वजह बनते हैं. आंतों में पाया जाने वाला बैक्टीरिया, जिस का नाम ई कोलाई है, महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन यानी यूटीआई की बड़ी वजह होता है. चूंकि महिलाओं की मूत्रनली गुदाद्वार यानी एनस के नजदीक होती है, इसलिए ई कोलाई को उस में आसानी से एंट्री मिल जाती है.

यूटीआई बहुत आम शब्द या बीमारी है जिस की गिरफ्त में महिलाएं हर कभी आ जाती हैं. कई महिलाओं को तो बारबार इस परेशानी से दोचार होना पड़ता है. छोटी मूत्रनली ई कोलाई के लिए शौर्टकट का काम करती है. इस का इकलौता बड़ा लक्षण पेशाब में जलन होना है जिस का वक्त रहते इलाज करवाना जरूरी होता है. नहीं तो यह किडनी तक पर असर डाल सकता है. सो, इस के नीचे बताए लक्षण दिखते ही डाक्टर से संपर्क करना चाहिए

1 – पेशाब करते समय जलन व दर्द

2 – बारबार तेज पेशाब आने की इच्छा

3 – पेशाब का थोड़ीथोड़ी मात्रा में निकलना

4 – पेट के निचले हिस्से में दर्द या दबाब जैसा महसूस होना

5 – पेशाब का रंग साफ न हो कर धुंधला होना और

6 – पेशाब में से बदबू आना या उस के साथ खून का आना.

किडनी तक पहुंचा तो बड़ा खतरा

इस ई कोलाई को किडनी तक पहुंचने से रोकने के लिए जरूरी है कि पेशाब की जलन को हलके में लेते नजरअंदाज न किया जाए वरना यह लाइलाज हो जाती है. यूटीआई 2 तरह का होती है. पहले को लोअर यूटीआई कहते हैं. इस में सिस्टाइटिस यानी मूत्राशय का संक्रमण सब से आम है. दूसरे को यूरेथ्राइटिस यानी मूत्रनली का संक्रमण कहते हैं.

अपर यूटीआई का ताल्लुक किडनी से होता है जिसे गुरदे का संक्रमण यानी पायलोनेफ्राइटिस कहते हैं. यह बेहद खतरनाक संक्रमण होता है जिस का जल्द और वक्त रहते इलाज न हो तो वह जानलेवा भी हो जाता है. इस से बचने के लिए बेहतर तो यह होता है कि लोअर यूटीआई का वक्त रहते इलाज कराया जाए जिस से इन्फैक्शन ऊपर की तरफ न बढ़े.

इस के लक्षण पेशाब की सामान्य या आम जलन से अलग होते हैं, मसलन-

1 – इस संक्रमण में बुखार आता है और ठंड भी लगती है

– पीठ या कमर के निचले हिस्से में भी दर्द होता है

3 – थकान जल्द महसूस होती है और

4 – मतली, उलटियां भी हो सकती हैं.

ऐसी स्थिति अव्वल तो आने ही नहीं देना चाहिए और अगर आ जाए तो तुरंत डाक्टर के पास भागना चाहिए. डाक्टर पेशाब की जांच कराते हैं और उस की बिना पर एंटीबायोटिक्स व दर्द से राहत के लिए पेनकिलर देते हैं. यहां इस बात का खयाल रखना जरूरी है कि एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर अपने मन से या कैमिस्ट की सलाह से या कि पहले के अनुभव के आधार पर नहीं लेना चाहिए. डाक्टर बैक्टीरिया के स्वभाव के मुताबिक ही एंटीबायोटिक्स देते हैं.

डाक्टर के बताए मुताबिक दवाओं का पूरा कोर्स करना भी बहुत जरूरी होता है. कई बार लक्षणों में फौरीतौर पर राहत मिलती है तो कई मरीज अब तो ठीक हो गए सोच कर कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं जो कि पहले से और ज्यादा खतरनाक साबित होता है क्योंकि पायलोनेफ्राईटिस के लौटने का खतरा बना रहता है.

आसान तरीके से इसे समझें तो बैक्टीरिया नीचे से ऊपर की तरफ जाता है. पहले बड़ी आंत, जो इस का अड्डा होती है, से बाहर आ कर एनस के जरिए मूत्रनली में दाखिल होता है. वहां से मूत्राशय यानी ब्लैडर में जाता है. वहां वे चिपक जाते हैं और आगे की तरफ बढ़ने लगते हैं. इसी को चिकित्सकीय भाषा में सिस्टाइटिस यानी मूत्राशय या ब्लैडर इन्फैक्शन कहते हैं. इस अवस्था में अगर इलाज न हो तो ये बैक्टीरिया मूत्रवाहिनी यानी यूरेटर से हो कर किडनी में पहुंच जाते हैं.

पायलोनेफ्राइटिस से यों बचें

1 – चूंकि ई कोलाई एनस से बाहर आता है, इसलिए शौच के बाद अच्छे से सफाई करना या धोना बहुत जरूरी है. हमेशा आगे से पीछे की तरफ धोना या पोंछना चाहिए.

2 – एक दिन में कम से कम 2 से 3 लिटर पानी पीना चाहिए.

3 – पेशाब को ज्यादा देर तक रोक कर न रखें. महिलाओं को इस दिक्कत का सामना ज्यादा करना पड़ता है. बस के लंबे सफर में, पारिवारिक या धार्मिक समारोहों में या व्यस्त बाजारों में वे देर तक पेशाब को रोक कर रखती हैं जो संक्रमण और जलन की वजह बनता है.

4 – सैक्स करने के बाद पेशाब जरूर करें.

5 – कौटन के अंडरवियर पहनें और

6 – डायफ्राम और स्पर्मीसाइट्स अगर इस्तेमाल करती हों और उन से बारबार यूटीआई की परेशानी पेश आती हो तो उन का इस्तेमाल करना बंद कर वैकल्पिक उपायों को अपनाएं. लेकिन सब से ज्यादा अहम है जलन शुरू होते ही डाक्टर को दिखाना. घरेलू इलाज से बचना चाहिए, यह अकसर रिस्की साबित होता है.

ये भी वजहें हैं जलन की

ई कोलाई के अलावा एक फंगस, जिसे कैंडिडा कहते हैं, महिलाओं में पेशाब की जलन का बड़ा कारण होता है जिसे वेजाइनल इन्फैक्शन कहते हैं. इस का सब से सामान्य लक्षण वेजाइना में खुजली व जलन का होना है. इस में पनीर जैसा डिस्चार्ज भी निकलता है. पेशाब में जलन की एक और बड़ी वजह बैक्टीरिया का असंतुलन होना होता है जिसे बैक्टीरियल वेजिनोसिस कहते हैं. इस में मछली की बदबू जैसा डिस्चार्ज निकलता है.

डिस्यूरिया की एक प्रचिलित वजह यौन संचरित संक्रमण भी है जिसे एसटीआई कहते हैं. यह इन्फैक्शन अकसर असुरक्षित यौन संबंधों से होते हैं. इस से बैक्टीरिया वायरस या पैरासाइट्स यूट्रस सर्विक्स (बच्चादानी) में सूजन पैदा करते हैं जिस से पेशाब करते वक्त जलन होती है. इस में प्राइवेट पार्ट के आसपास खुजली, जलन या सूजन भी होती है. कई बार दाने, छाले या मस्से भी हो जाते हैं. एसटीआई में भी बदबूदार डिस्चार्ज होता है.

एसटीआई में कई यौनरोग, जैसे क्लैमाइडिया, सूजाक यानी गेनेरिया व हर्पीज होने की आशंका बनी रहती है. इसलिए लक्षण दिखते ही इलाज करवाना शुरू कर देना चाहिए. कुछ मामलों में यह महिलाओं में एचपीवी सर्वाइकल कैंसर की वजह भी बनता है. एचपीवी (ह्यूमन पेपीलोमा वायरस)  कहलाता है जिस से मस्से पैदा होते हैं. इस की वैक्सीन आजकल उपलब्ध है जो किसी बड़े क्लीनिक या अस्पताल से लगवाई जा सकती है.

अकसर कई महिलाओं को मेनोपौज होने के बाद भी पेशाब में जलन महसूस होती है. इसे एट्रोफिक वेजिनाइटिस कहते हैं. इस में एस्ट्रोजन की कमी होने से मूत्रनली की झिल्ली ड्राई और संवेदनशील हो जाती है. पेशाब में जलन होने के अलावा इस में सैक्स के दौरान दर्द होता है और पेशाब बारबार होता है.

पेशाब में जलन की ये तमाम अंदरूनी वजहें थीं. पर कई बार कुछ बाहरी कारणों के चलते भी पेशाब में जलन होती है, मसलन बबल बाथ, ज्यादा खुशबूदार साबुन का इस्तेमाल, योनि के आसपास परफ्यूम या डियोडरैंट का प्रयोग और टाइट सिंथेटिक अंडरवियर पहनना. इन से बचना ही बेहतर होता है.

कई बार केथेडर लगाने के बाद भी पेशाब में जलन होती है और सैक्स के दौरान अगर चोट लग जाए तो भी पेशाब में जलन होती है. नातजुरबेकारी के चलते नवविवाहिताओं को इस परेशानी का सामना अकसर करना पड़ता है. वेजाइना के आसपास त्वचा रोग, मसलन एक्जिमा और लाइकेन स्क्लेरोसिस हो जाने से भी पेशाब में जलन की परेशानी होती है. हालांकि ये बहुत आम कारण नहीं हैं लेकिन समस्या 2-3 दिन से ज्यादा बनी रहे तो तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए खासतौर से उस वक्त जब खुजली भी हो रही हो और बुखार भी आ रहा हो.

पेशाब की जलन का खुद से इलाज करना एक तरह से परेशानी और बीमारी को और बढ़ाने वाला ही साबित होता है क्योंकि इस की असल वजह पेशाब की जांच के बाद डाक्टर ही तय कर सकता है और उस के मुताबिक ही वह ट्रीटमैंट देता है.

पेशाब में जलन को महिलाएं अकसर, खासतौर से संयुक्त परिवारों में, शर्म या झिझक के चलते छिपाए रखती हैं जिस से परेशानी और बीमारी दोनों बढ़ती हैं. इस से से बचना चाहिए, साथ ही, अपने लैवल पर इन बातों पर अमल करते रहना चाहिए-

1 – योनि को हमेशा सादा और साफ पानी से धोना चाहिए.

2 – उसे साबुन से नहीं धोना चाहिए.

3 – कभी ड्राईनैस महसूस हो तो नारियल का तेल ऊपरी हिस्से पर लगाया जा सकता है लेकिन इसे अंदर नहीं जाने देना चाहिए.

4 – सैक्स करते वक्त हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए. इस बाबत अपने पार्टनर पर दबाब बनाना भी कोई गलत बात नहीं.

5 – पीरियड्स के दौरान पैड बारबार बदलना चाहिए.

6 – अपनी डाइट में सादा दही शामिल करें, इस से अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं.

7 – डाइट में ओमेगा-3 वाले आइटम भी शामिल करें, मसलन अलसी व अखरोट आदि.

8 – शकर का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए क्योंकि इस से यीस्ट बढ़ता है. और

9 – सब से अहम बात, रोजाना कम से कम 2 से 3 लिटर पानी पीना चाहिए.

साथ ही, इन कुछ बातों से बचना भी चाहिए जो पेशाब में जलन के साथसाथ इस से जुड़ी दूसरी बीमारियों की भी वजह बनती हैं.

1 – डूशिंग, वेजाइनल, डीऔडरैंट स्प्रे या वाइप्स का इस्तेमाल न करें.

2 – स्पर्मीसीइट्स या खुशबूदार लुब्रिक्रेंट्स का बारबार इस्तेमाल न करें और

3 – योनि के अंदर घरेलू इलाज या टोटकों के नाम पर कुछ भी न डालें. अकसर महिलाएं सिरका, लहसुन और बेकिंग सोडा जैसी चीजें योनि के अंदर डाल लेती हैं. इन से कोई राहत तो मिलती नहीं, उलटे, आफत जरूर आ जाती है.

प्रोस्टेटाइटिस से परेशान पुरुष

यह ठीक है कि पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले डिस्यूरिया कम होता है लेकिन जब होता है तो अकसर खतरनाक शक्ल भी इख्तियार कर लेता है. सब से बड़ी वजह तो महिलाओं की तरह यूटीआई ही होती है जिस के बारे में ऊपर बताया गया है. लेकिन पुरुषो में पाई जाने वाली बीमारी प्रोस्टेटाइटिस, जिसे बोलचाल की भाषा में प्रोस्टेट ही कहते हैं, बहुत आम है जिस के 40 वर्ष की उम्र के बाद होने की आशंका बढ़ जाती है.

प्रोस्टेट अखरोट के आकार की एक ग्रंथि होती है जो यूरिन ब्लैडर के ठीक नीचे रहती है. इस का अहम काम वीर्य बनाना होता है. इस प्रोस्टेट ग्लैंड में सूजन या संक्रमण का होना ही प्रोस्टेटाइटिस कहलाता है. इस का प्रमुख लक्षण पेशाब में जलन तो है ही, लेकिन ये लक्षण भी दिखें तो पुरुषों को सतर्क हो जाना चाहिए-

1 – पेशाब करते वक्त कठिनाई होना.

2 – पेशाब का रुकरुक कर उतरना.

– बारबार पेशाब लगना. यह हालत अकसर रात के समय ज्यादा होती है.

3 – पेशाब की धार कमजोर होना.

4 – पेशाब शुरू करने में दिक्कत होना.

5 – अचानक से तेज पेशाब लगना.

6 – पेशाब कर लेने के बाद भी ब्लैडर भराभरा महसूस होना.

7 – एक लक्षण जिस का प्रोस्टेटाइटिस के सभी मरीजों में होना जरूरी नहीं वह मलद्वार यानि एनस के बीच के हिस्से, जिसे पेरिनेयूम कहा जाता है, में लगातार दर्द या भारीपन का होना है.

– ऊपर बताए लक्षणों के साथसाथ अगर कमर, पेट के निचले हिस्से या अंडकोष में भी दर्द हो तो यह भी प्रोस्टेटाइटिस का ही संकेत होता है.

– सेक्स के दौरान डिस्चार्ज होते वक्त दर्द महसूस होना.

– कभीकभी पेशाब के साथ खून भी इस बीमारी में जाता है.

– कुछ मरीजों के वीर्य में खून आता है.

जरूरी नहीं कि सभी लक्षण एकसाथ दिखें. यह, दरअसल, प्रोस्टेटाइटिस की अवस्था पर निर्भर करता है. इस के प्रकारों को समझें तो रोग जल्द समझ आता है.

– एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस अचानक होता है. यह गंभीर बैक्टीरियल इन्फैक्शन होता है जिस में लक्षण तेजी से प्रकट होते हैं, मसलन अचानक से तेज बुखार आना, ठंड लगना और पेशाब करने में जरूरत से ज्यादा दिक्कत या कठिनाई होना. कई बार पेशाब रुक भी जाता है.

– क्रौनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस में इन्फैक्शन धीरेधीरे और बारबार होता है. ये लक्षण बहुत हलके होते हैं और अकसर आतेजाते रहते हैं. इन्हें नजरअंदाज करने की भूल या लापरवाही नहीं करनी चाहिए. इस में पेशाब में जलन तो होती ही है, साथ ही, पेल्विक क्षेत्र में और सैक्स के दौरान डिस्चार्ज होने में भी दर्द होता है

– क्रौनिक प्रोस्टेटाइटिस या क्रौनिक पेल्विक पेन सिंड्रोम प्रोस्टेटाइटिस का सब से आम प्रकार है. इस में प्रोस्टेट में सूजन आती है और पेल्विक हिस्से में दर्द होता है. लेकिन जांच में कोई बैक्टीरिया नहीं निकलता. इस प्रोस्टेटाइटिस की वजह कोई पुरानी चोट, तनाव या नसों की समस्या आमतौर पर होती है.

– एसिप्टोमेटिक इन्फ्लेमेट्री प्रोस्टेटाइटिस में प्रोस्टेट में सूजन तो होती है लेकिन मरीज को कोई लक्षण, मसलन दर्द, जलन या पेशाब में रुकावट महसूस नहीं होता. इस का पता तभी चलता है जब बांझपन या प्रोस्टेट कैंसर की जांच होना होती है. इस से ताल्लुक रखती एक दिलचस्प बात यह है कि इस में किसी इलाज की जरूरत नहीं होती क्योंकि मरीज को कोई तकलीफ ही नही होती. इस की पहचान होने पर डाक्टर इस की निगरानी भर करते हैं. कुछ विशेष परिस्थितियों में डाक्टर्स कैंसर का शक दूर करने के लिए दवाएं देते हैं.

प्रोस्टेटाइटिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि यह बैक्टीरिया से हुआ है या दूसरी किसी वजह, मसलन पुरानी चोट वगैरह से हुआ है. अगर यह बैक्टीरिया से हुआ है तो डाक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं जो पेशाब की जांच में पाए गए बैक्टीरिया के मुताबिक होती हैं. दर्द से राहत के लिए पेनकिलर भी दी जाती हैं. क्रौनिक प्रोस्टेटाइटिस या क्रौनिक पेल्विक पेन सिंड्रोम प्रोस्टेटाइटिस, जिस में बैक्टीरिया नहीं मिलता, के लिए कुछ दवाओं के साथ हलके व्यायाम और गरम पानी से सिंकाई की सलाह डाक्टर देते हैं. लेकिन कोई भी उपाय या इलाज बगैर डाक्टरी सलाह के नहीं करना चाहिए.

महिलाओं की तरह पुरुषों में पेशाब में जलन एसटीआई के चलते भी होती है और मूत्रमार्ग में सूजन से भी होती है. एसटीआई को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि इस से गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसी खतरनाक यौन बीमारियों के होने की आशंका रहती है. कई बार पेनिस में जलन भी होती है और सफेद पीले या हरे रंग का डिस्चार्ज भी होता है. किडनी या मूत्राशय की पथरी भी पेशाब की जलन का कारण बनती है. इस से बचने के लिए जरूरी है कि तुरंत ही डाक्टर को दिखाया जाए और जो जांच वह कहे वे वक्त पर करवाई जाएं. देर करने से बीमारी बढ़ती ही है. किसी चमत्कार के चलते ठीक होने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

पेशाब में जलन होने पर पुरुषों को भी एहतियात वही रखनी चाहिए जो महिलाओं के लिए ऊपर बताई गई हैं. इन में भी पानी ज्यादा पीना और कंडोम का हमेशा इस्तेमाल बहुत जरूरी है.

अकसर पुरुष भी लाजलिहाज व शर्म के चलते पेशाब की जलन को छिपाने की कोशिश करते हैं जबकि यह सामान्य बात है, कोई अभिशाप नहीं. इसलिए जितनी जल्द हो सके, अपने फिजीशियन या यूरोलौजिस्ट को दिखाना चाहिए. Painful Urination

 

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