Sanatan Dharma: मवेशियों में बकरी से भी पहले गाय सबसे कमजोर पशु है जिसमें सनातनी संत 33 करोड़ देवी देवताओं का वास बताते हैं. अधिकतर गौ पालक बड़े समझदार होते हैं जो गाय का दूध तो दुहते हैं लेकिन उसे चरने के लिए छुट्टा छोड़ देते हैं. सनातनी गाय है और उसके पालक सनातन के धीरेन्द्र शास्त्री उर्फ़ बाबा बागेश्वर जैसे सैकड़ों स्वयं भू बाबा उसके ठेकेदार हैं. इन्हें सिर्फ दूध मलाई से मतलब होता है, चारे पानी से नहीं. मोहल्लों, कालोनियों और जंगलों से लेकर देश भर के हाईवे आवारा गायों से सटे पड़े हैं.
धीरेन्द्र शास्त्री की कोई 500 किलोमीटर लम्बी `सनातन हिन्दू एकता रथ यात्रा` का घोषित बड़ा मकसद हिन्दू राष्ट्र का संकल्प था. जिसे लेकर यह बाबा अक्सर हाहाकारी टाइप के बयान देकर हिन्दू मुस्लिम नफरत को हवा देता रहता है. उसे बेहतर मालूम है कि हिन्दू राष्ट्र की बुनियाद ही मुसलमान, दलित, आदिवासी और सवर्ण औरतों के शोषण पर टिकी है. इसी मंशा से उसने सागर में कहा कि गरबा पांडालों में प्रवेश देने से पहले आने बालों को गौ मूत्र पिलाना चाहिए या फिर मुख्य दरवाजे पर गौ मूत्र रखा जाना चाहिए जिससे शुद्धिकरण होता रहे.
गोया कि गौ मूत्र अब आधार कार्ड का विकल्प होगा. बाबा ने यह नहीं बताया कि अगर कोई मुसलमान गौ मूत्र पान के बाद भी गरबा पांडाल में दाखिल होकर रास रचा कर चला जाए तो उसकी पहचान कैसे होगी. और क्या गौ मूत्र कोई मेटल डिक्टेक्टर है जो मुसलमान को पहचान कर चिल्ला उठेगा कि होशियार यह अतुल नहीं अब्दुल है.
असल में बाबा की मंशा यह है कि सनातनी गाय सरीखा कमजोर रहे. खाए पिए यानी चरे बाहर लेकिन दूध इनके दरबार में आकर दे यानी दक्षिणा देता रहे जिससे ये माल पुए उड़ाते रहें.
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