Public Protest Delhi: वोट चोरी मुद्दे पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को रोकने के लिए ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं को बाधित करने से सबसे बड़ा बोझ आम यात्रियों, दिहाड़ी मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है.
इन फैसलों के कारण दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है. किसी को अस्पताल पहुंचना है, किसी को नौकरी पर जाना है, किसी विद्यार्थी की परीक्षा या कोचिंग छूट गई है, तो किसी को परिवार के पास लौटना है.
ट्रेनें रद्द होने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ रही है. बस अड्डों पर भीड़ बढ़ने, अतिरिक्त किराया चुकाने और यात्रा में देरी जैसी परेशानियों ने आम आदमी जूझ रहा है. मगर सरकार को तो अपनी गद्दी बचानी है. लिहाजा सब बंद. सड़कें बंद, जनता का आना जाना खाना पीना और जरूरत पड़े तो सांस लेना भी बंद.
रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों और छोटे कारोबारियों के लिए एक दिन की यह बाधा भी बड़ा आर्थिक संकट है, इस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. बाजारों, दुकानों, रेस्तरां, दफ्तरों, टैक्सी चालकों और छोटे व्यापारियों का कारोबार आज पूरी तरह ठप्प है. कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के कारोबार को लेकर मात्र एक दिन में करीब 200 से 250 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान का अनुमान है.
सवाल यह है कि किसी प्रदर्शन की आशंका से निपटने के लिए क्या पूरी राजधानी की सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित कर दिया जाएगा? कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उसके नाम पर आम नागरिकों को सामूहिक सजा देना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है. Public Protest Delhi




