Gen Z: नीट एग्जाम में लीक के जिम्मेदार धर्मेंद्र प्रधान को एजुकेशन मिनिस्ट्री से धकेलने के बाद उन्होंने सरकारी स्कूलों की पोल खोलनी शुरू की तो देश की सभी स्टेट गवर्नमैंट्स घबरा गईं. आननफानन बजट सैंक्शन होने लगे, अपौइंटमैंट्स होने लगे. इन कौकरोचों की विजिट के सामने इंकमटैक्स, ईडी, सीआईडी की रेड फीकी पड़ गईं. इन्हें देखते ही स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन डर के मारे कांपने लगता है.
अब इन्होंने इलैक्शन कमीशन को लपेटे में ले लिया कि इलैक्शन कमीशन जानबूझ कर 18 वर्ष के हुए जेनजी से वोट देने का हक छीन रहा है. इलैक्शन कमीशन ने ऐसे फौर्म बनाने शुरू किए थे, ऐसे सवाल पूछने शुरू किए थे कि 18 वर्ष के यूथ इलैक्शन कमीशन की झंझट में पड़ने की जगह वोट दिए बिना रहने को तैयार थे लेकिन कौकरोच जनता पार्टी वाले नहीं. उन्होंने जंतरमंतर को दोहराने की धमकी दे डाली.
हिंदू धर्म की मजबूत दिखने वाली लेकिन अंदर से खोखली व बेईमानी से भरी रस्सी की गांठ अब खुलने लगी है. धर्म का धंधा चल रहा है पर जेनजी को धर्म के चुंगल में फंसाने का काम गले पडऩे लगा है. जहां भी जेन के लोग विजिट करते हैं वहां उन का अपोज करने के लिए हिंदू धर्म के जो गुंडे पहुंचते हैं वे 40 वर्ष की उम्र से ज्यादा व शातिर दिखने वाले, पर जिन की आंखों में खौफ है, होते हैं. दुबलेपतले व मोबाइलों से रील बनाने वाले जेनजी वौलंटियरों के आगे वे घबराए व खुद के लिए पुलिस प्रोटैक्शन मांगते नजर आते हैं.
आज कम से कम भारत की जेनजी ने बता दिया है कि वह सोशल मीडिया पर सिर्फ नाचगाना या फैशन की रील्स ही नहीं देखता. वह पौलिटिकली अवेयर है. उस में लीडरशिप है. वह सवाल पूछना जानता है और पूछे गए सवालों से भागता नहीं. वह नरेंद्र मोदी की तरह भयभीत, स्केअर्ड नहीं है जो कहीं भी किसी को भी जवाब नहीं देते क्योंकि वे तो संतोंमहंतों की एकतरफा गपबाजी में विश्वास रखते हैं.
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