Ohio Hindu Temple Attack: 2 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के ओहायो राज्य के ग्रेटर क्लीवलैंड इलाके में स्थित श्री स्वामीनारायण वडतालधाम हिंदू मंदिर की खिड़कियां तोड़ी गईं. यह घटना मंदिर में पुजारियों और भक्तों के मौजूद रहते हुई. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और नॉर्थ अमेरिका के हिंदुओं के संगठन ने इस घटना का विरोध किया है और सख्त कार्रवाई की मांग की है. एक सेकुलर देश में किसी भी अल्पसंख्यक समाज की आस्था पर ठेस पहुँचाना गलत है इसकी जितनी निंदा की जाये कम है लेकिन इस घटना के पीछे छिपे बड़े सवालों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.

अमेरिका में मंदिर पर ईंट फेंके जाने से जो हिंदू संगठन आज घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं उनका गुस्सा जायज तो है लेकिन इस घटना के बाद उनका दोहरा चरित्र भी सामने आ गया है. आज जो हिन्दू संगठन चिल्ला रहे हैं की अमेरिका का हिन्दू सुरक्षित नहीं है और कह रहे हैं कि किसी भी सेकुलर देश में अल्पसंख्यक की आस्था का सम्मान होना चाहिए उनसे पूछा जाना चाहिए कि यही नियम भारत में क्यों नहीं लागू होता? जब भारत के यही हिन्दु संगठन ईसाइयों के चर्चो को आग लगाते हैं, मस्जिदों पर चढ़कर भगवा लहाराते हैं और बुलडोजर से मजारें मस्जिदें और चर्च के टूटने पर जय श्री राम के नारे लगाते हैं तब इन्हें यही सेकुलररिज्म क्यों याद नहीं आता? क्या अमेरिका में अल्पसंख्यक हिंदू की आस्था पवित्र है और भारत में अल्पसंख्यक मुसलमान और ईसाई की आस्था अपवित्र है.

ओहायो में मंदिर की खिड़की पर ईंट मारने की घटना शर्मनाक है साथ ही भारत में मस्जिद की मीनार पर चढ़कर झंडा फहराना और चर्च जलाना भी शर्मनाक है. दोनों ही घटनाएं एक ही बीमारी से पैदा होती हैं और वह बीमारी है धर्म का अहंकार. अगर यह हिन्दू संगठन चाहते हैं कि अमेरिका में मंदिर सुरक्षित रहें तो उन्हें भारत में भी मस्जिद और चर्च को सुरक्षित रखना सीखना होगा. अमेरिका में सेकुलरिज्म चाहिए और भारत में बुलडोजर, यह दोगलापन है और जब तक यह दोगलापन रहेगा तब तक न ओहायो का कोई मंदिर सुरक्षित होगा और न भारत की कोई मस्जिद सुरक्षित रहेगी इसलिए हल यही है कि धर्म को घर में रखना सीखिए और देश को संविधान से चलने दीजिये.

मंदिर, मस्जिद, चर्च आखिर हैं क्या? यह ईंट, सीमेंट और इंसान की मेहनत से बनी इमारतें हैं जिनमें इंसान ने ही अपने डर और अपनी कल्पना से भगवान को बिठा दिया है. जब हम इन इमारतों को पवित्र और अपवित्र में बांटते हैं तो हम इंसानों को भी पवित्र और अपवित्र, अपने और पराये में बांट देते हैं. ओहायो के मंदिर में ईंट फेंकने की घटना इसी मानसिकता का परिणाम है. यही नफ़रत किसी मस्जिद या चर्च पर बम बन कर भी फटती है इसलिए धर्म जब तक रहेगा तब तक यह हमला-तोड़फोड़ चलता रहेगा क्योंकि धर्म सिखाता ही है कि मेरा भगवान सच्चा और तेरा झूठा.

सवाल यह है कि इसका हल क्या है? धर्म के ठेकेदार इसका हल फिर से धर्म में ढूंढेंगे और कहेंगे कि हिंदू एक हो जाओ, मुसलमान एक हो जाओ, ईसाई एक हो जाओ और इससे नफरत की खाई और गहरी होगी जबकि असली समाधान धर्म में नहीं बल्कि धर्म से मुक्ति में है क्योंकि धर्म इंसान को इंसान के तौर पर नहीं देखता. मंदिर की खिड़की टूटी है तो उसकी मरम्मत हो जाएगी लेकिन जो खिड़की इंसान के दिमाग में धर्म ने बंद कर रखी है कि तू हिंदू, तू मुसलमान, तू यहूदी, जब तक वह खिड़की नहीं खुलेगी तब तक दुनिया में शांति नहीं आएगी. कहीं न कहीं कोई न कोई मंदिर, मस्जिद, चर्च टूटता ही रहेगा और इन धर्म की दुकानों के लिए लोग मरते रहेंगे. Ohio Hindu Temple Attack

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