Manifestation Truth: शोशल मीडिया पर आजकल एक शब्द ज्यादा सुनाई देने लगा है वह है, Manifestation. यानी कोई चीज जिसे तुम शिद्द्त से चाहो तो कायनात उसे तुमसे मिलाने की जद्दोजहद मे लग जाता है. मेनिफेस्टेशन का कॉन्सेप्ट इस फ़िल्मी डायलॉग के इर्द गिर्द ही घूमता है. शोशल मीडिया पर कई लोग पॉडकास्ट मे इसे लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं जिनका कोई सिर पैर नहीं होता. आंख बंद करो, ब्रह्मांड से मांगो और 24 घंटे में वो चीज मिल जाएगी. सुनने में अच्छा लगता है लेकिन सच इससे बिलकुल अलग है.

सच ये है कि मेनिफेस्टेशन काम तो करता है लेकिन यह जादू की तरह काम नहीं करता बल्कि यह साइकोलॉजिकल गेम है जिसे समझने की जरूरत है. किसी ने नौकरी या पैसा शिद्द्त से मांगा तो ब्रह्मांड नौकरी का ऑफर लेटर या 10 लाख रुपये हवा से नहीं गिराएगा. अगर ऐसा होता तो दुनिया में कोई गरीब ही नहीं होता.

मेनिफेस्टेशन असल में सबकांशियस माइंड का गेम है. जिसे समझ कर रातों रात सिकंदर नहीं बना जा सकता लेकिन जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है. जब कोई व्यक्ति रोज किसी एक लक्ष्य के बारे में सोचता है, उसे महसूस करता है, उसे पाने की कल्पना करता है तो उसका दिमाग धीरे-धीरे उसी चीज पर फोकस करने लगता है. साइकोलॉजी में इसे रेटिक्युलर एक्टिवेटिंग सिस्टम कहते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ठान लिया कि उसे हर हाल मे नई बाइक चाहिए और वह रोज उसके बारे में सोचने लगा तो अचानक उस शक्श को हर गली में वही बाइक दिखने लगेगी, दोस्त भी बताएंगे कि फलां जगह डिस्काउंट चल रहा है. पहले भी वो चीजें थीं, पर दिमाग उन पर ध्यान नहीं दे रहा था. मेनिफेस्टेशन ने बस व्यक्ति का फोकस बदल दिया.

दूसरी बात, जब कोई व्यक्ति किसी चीज को पाने की ठान लेता है तो उसका कॉन्फिडेंस और मेहनत दोनों बढ़ जाते हैं. मुझे ये जॉब मिलनी ही है ये सोचने वाला इंसान 10 जगह CV भेजता है, इंटरव्यू की तैयारी करता है, रिजेक्ट होने पर भी दोबारा ट्राई करता है और मुझसे नहीं होगा सोचने वाला इंसान एक बार रिजेक्ट होते ही हार मान लेता है. अब बताओ किसको जॉब मिलने के चांस ज्यादा हैं? यहीं मेनिफेस्टेशन काम कर जाता है. यह हार न मानने वाली एनर्जी देता है लेकिन जहां लोग गलती करते हैं वो ये है कि वो सिर्फ सोचते रहते हैं और एक्शन जीरो रखते हैं.

बिस्तर पर लेटकर मैं अमीर हूं, मैं अमीर हूं 108 बार बोलने से कोई अमीर नहीं हो सकता. अमीर बनने के लिए स्किल सीखनी पड़ेगी, पैसे बचाने पड़ेंगे, बिजनेस या नौकरी करनी पड़ेगी. मेनिफेस्टेशन वो पेट्रोल है जो गाड़ी को फ्यूल के रूप मे एनर्जी देता है लेकिन गाड़ी खुद ही चलानी पड़ती है. बिना स्टीयरिंग और ब्रेक के सिर्फ पेट्रोल डालने से गाड़ी नहीं चलती.

मोटापे से परेशान कोई व्यक्ति बिस्तर पर पड़े हुए मोटापा कम होने की कल्पना करता रहे तो उसका मोटापा कम नहीं होगा. मेनिफेस्टेशन का सही फॉर्मूला 3 चीजों का कॉम्बिनेशन है. पहला, साफ सोच. मुझे पतला होना है जैसा धुंधला लक्ष्य नहीं. मुझे अगले 6 महीने में 30 किलो वजन घटाना है जैसा साफ लक्ष्य. दूसरा- उसे महसूस करना. जैसे वजन कम हो चुका है. इससे मोटिवेशन आता है और डर कम होता है. तीसरा और सबसे जरूरी, एक्शन. प्लान बनाओ और रोज एक्सरसाइज करो.

निष्कर्ष यही है. मेनिफेस्टेशन जादू नहीं है, ये माइंडसेट का टूल है. ये सोच को पॉजिटिव करता है, मौके दिखाता है और हार न मानने की ताकत देता है लेकिन आखिरी में काम खुद ही करना पड़ता है. मेनिफेस्टेशन मे तीन चीजें महत्वपूर्ण हैं. पहली चीज है, सिर्फ सोचना और कुछ न करना. यह बर्बादी का रास्ता है. इसमें इंसान बस सोचता रह जाता है और उसके आसपास की दुनिया आगे निकल जाती है. वह किस्मत को दोष देता है, रिश्तों को जिम्मेदार ठहराता है और एक दिन बिना कुछ किये जिंदगी से थक जाता है. दूसरी चीज है, सोचना और कल्पना करना. इस स्थिति में फंसे लोगों का ध्यान तो अपने लक्ष्य पर होता है लेकिन वे लक्ष्य तक कभी नहीं पहुंच पाते. तीसरी चीज है, सोचना और काम करना. यह सच में काम करता है. इसमें लक्ष्य साफ है और लक्ष्य साफ होने से प्लानिंग, मोटिवेशन और परसिस्टेंस बेहतर होता है जिससे कामयाबी जल्द हासिल होती है. Manifestation Truth

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