Anjana Om Kashyap Controversy: कहते हैं कि कभी-कभी किसी विचार को सही दिशा देने के लिए एक सही शब्द की ज़रूरत होती है लेकिन देश भर में चल रहे प्रोटेस्ट में बात उल्टी पड़ गई है. यहाँ एक गलत और अहंकार से भरे शब्द ने खलबली मचाई और पूरे देश के स्टूडेंट्स को जगा दिया. देश के कोने-कोने में छात्र अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतर आये हैं. इस आंदोलन की तुलना इतिहास के कुछ बड़े जन-आंदोलनों से की जा रही है. सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके की अगुवाई में शुरू हुआ यह प्रोटेस्ट अब दुनिया भर की मीडिया कवरेज का हिस्सा बन रहा है.
मेनस्ट्रीम मीडिया की टॉप एंकर अंजना ओम कश्यप इस छात्र क्रांति के पीछे का सबसे बड़ा ट्रिगर पॉइंट साबित हुईं हैं. विवाद की चिंगारी तब भड़की जब देश के करोड़ों युवाओं को कॉम्पीटिटिव एग्जाम की तैयारी कराने वाले ऑनलाइन टीचरों को अंजना ओम कश्यप ने “दो कौड़ी का टीचर” कह डाला. इस एक लाइन ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं. यूपीएससी, एसएससी और नीट जैसे एग्ज़ाम्स के लिए करोड़ों बच्चे यूट्यूब पर पढ़ाने वाले टीचरों को अपना मार्गदर्शक मान कर तैयारी करते हैं. जब इन्हीं टीचरों को दो कौड़ी का बोला गया तब स्टूडेंट्स यह बर्दाश्त नहीं कर पाए. यह टिप्पणी सीधे तौर पर युवाओं के आत्मसम्मान पर चोट थी. इस बयान के आते ही सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग हब्स तक एक ऐसा सैलाब आया जिसकी कल्पना शायद टीआरपी की दौड़ में अंधी हो चुकी न्यूज़ एंकर ने भी नहीं की होगी.
इस एक अपमानजनक शब्द के बाद विवाद ऐसा भड़का कि देश के टॉप ऑनलाइन एडुकेटर्स एकजुट हो गए. कुछ ही घंटों के भीतर ट्विटर पर #ApologizeAnjana जैसे हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे, जिन्हें कुछ ही दिनों में 50 लाख से ज्यादा इंप्रेशन्स और ट्वीट्स मिले. यह केवल एक पत्रकार के खिलाफ गुस्सा नहीं था बल्कि वह मोड़ था जहाँ छात्रों को समझ आ गया कि असल में दो कौड़ी की सोच किसकी है? जिस मीडिया को देश का चौथा स्तंभ होना चाहिए था वह तो कब का धाराशाई हो चुका था. बची खुची कसर अंजना कश्यप जैसी पत्रकारों ने पूरी कर दी. पेपर लीक से सरकार ने बच्चों का भविष्य बर्बाद किया और एसी कमरों में बैठकर सरकार से पेपर लीक पर सवाल करने की बजाये अंजना उन टीचरों को ही नीचा दिखा रही थी जो लाखों करोड़ों बच्चों के भविष्य को बनाने का काम करते हैं.
इस विवाद ने छात्रों और मीडिया के सामने एक मजबूत रेखा खींच दी. एक तरफ वह ज़हरीली और चिल्लाने वाली पत्रकारिता थी जो सिर्फ टीआरपी बेचती है और दूसरी तरफ वे शिक्षक थे जो दिन-रात मेहनत करके देश के सबसे निचले तबके के बच्चे को भी अफसर बनाने का सपना दिखाते हैं और उन सपनों को पूरा भी करवाते हैं. अंजना ओम कश्यप के एक बयान ने स्टूडेंट्स को यह पहचानना सिखा दिया कि सच्चे राष्ट्र-निर्माता उनके वो टीचर्स हैं जो उन्हें कामयाबी का रास्ता दिखाते हैं और दो कौड़ी के वो पत्रकार हैं जो स्टूडियो में बैठकर केवल प्रोपेगैंडा फैलाते हैं.
प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों का गुस्सा इस दो कौड़ी की मेनस्ट्रीम मीडिया पर निकल रहा है तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है. हालात यह हैं कि गोदी मीडिया मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं और उन्हें खदेड़ा जा रहा हैं लेकिन यह बेशर्म मीडिया सुधरने का नाम नहीं ले रही है. स्टूडियो में प्रोटेस्ट को बदनाम करने के लिए तरह तरह के हठकंडे अपनाये जा रहे हैं. सोनम वांगचुक को चीन का एजेंट बताया जा रहा हैं तो प्रोटेस्ट में पाकिस्तानी कनेक्शन भी ढूंढा जा रहा है. Anjana Om Kashyap Controversy





