Share Market: आजकल यूट्यूब पर शेयर बाजार का ऐसा महाकुंभ लगा है जैसे वित्तीय प्रबंधन की बात नहीं, प्रवचन चल रहे हों. हर तीसरा व्यक्ति ज्ञान का दीपक लिए ऐसे बतिया रहा है मानो वारेन बफेट ने इन्हें गोद में बैठा कर निवेश की बारीकियां सिखाई हों. या नहीं तो मां के पेट से सीख कर जैसे आए हैं.
गला फाड़ कर कोई कहता है अगर पैसे कमाने हैं और यह वीडियो अंत तक नहीं देखा तो ज़िंदगीभर पछताओगे. कोई कहता है कि अगर 2019 में इस शेयर विशेष में एक लाख रुपए लगाए होते तो आज तेरह लाख रुपए हो गए होते. हां, पूरे तेरह लाख. कोई और आगे बढ़ कर बताता है कि विप्रो में 1980 में एक लाख लगाने वाले आज सात सौ पचास करोड़ के मालिक होते.
फिर अंतिम ब्रह्मज्ञान आता है बर्कशायर हैथवे में 1965 के एक हजार आज पांच हजार पांच सौ करोड़ हैं. इन वीडियो को देख कर आम निवेशक को ऐसा लगता है कि उस की सब से बड़ी गलती यह थी कि वह 1965 या 1980 के पहले पैदा क्यों नहीं हुआ, और अगर हुआ भी तो शेयर बाजार में क्यों नहीं उतरा. अब वह पचपन में बचपन के नाम से पछता रहा है कि उस समय उस ने शेयर के स्थान पर खिलौने क्यों खरीदे, पतंगमांझे, कंचे, लटटू, टौफी, बर्फ के गोले में पैसे क्यों बरबाद किए.
इन यूट्यूबियों की एक खूबी यह है कि इन का सारा ज्ञान अतीत में रहता है. भविष्य इन के चैनल पर आने से डरता है. पीछे मुड़ कर ऐसे बताते हैं मानो तब भी सब इन्हें पता था. सवाल यह है कि जब सब मालूम था तो खुद क्यों नहीं बनाए एक लाख के तेरह या एक लाख के 750 करोड़? तब महाज्ञानी कहां थे, क्यों नहीं उसी समय पाठशाला खोल ली.
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