Sonam Wangchuk: लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद आखिरकार 26वें दिन अपना अनशन समाप्त कर दिया है. 23 जुलाई की रात करीब 12.30 बड़े भाजपा नेता जेपी नड्डा और जीतेन्द्र सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिला कर अनशन खत्म कराया.

वांगचुक के अनशन ख़त्म करने पर सवाल उठ रहे हैं कि अब आंदोलन का क्या होगा? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है, ऐसे में अभिजीत दीपके के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं की जो भीड़ अनशन स्थल पर है और जिन्होंने बीते चार दिनों में पुलिस की बर्बरता झेली, लाठियां खाईं, क्या वह मायूस नहीं होगी?

जानकारों की मानें तो अनशन समाप्त होना किसी आंदोलन का अंत नहीं होता, बल्कि कई बार यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत का संकेत होता है. यदि सरकार ने बातचीत, प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात या मांगों पर विचार का आश्वासन दिया है, तो अब असली परीक्षा उस आश्वासन को ठोस फैसलों में बदलने की है.

भारतीय लोकतंत्र में आंदोलनों का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं होता, बल्कि सत्ता और समाज के बीच संवाद का रास्ता खोलना भी होता है. इस आंदोलन की बड़ी सफलता यह है कि इसने अहंकार में डूबी मोदी सरकार को अंततः घुटनों पर ला दिया. आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी को सोशल मीडिया पर आकर चार बात बोलनी ही पड़ी, भले उन बातों में कोई दम नहीं था, और जनता ने उन पर ध्यान भी नहीं दिया. फिर भी यह इस आंदोलन की सफलता ही मानी जाएगी.

यह बात भी गौर करने वाली है कि बीते चार दिन से भाजपा नेताओं की सिट्टीपिट्टी गुम है. सोशल मीडिया पर लगातार हिन्दू-मुस्लिम करने और साम्प्रदायिकता का जहर उगलने वाले नेता चाहे वे सुधांशु त्रिवेदी हों, गिरिराज सिंह हों, योगी आदित्यनाथ हों या निशिकांत दुबे हों, चार दिन से उनके मुंह बंद हैं. सोशल मीडिया पर दिनरात साम्प्रदायिकता का जहर उगलने वाले अंधभक्तों की भीड़ भी अचानक नदारद हो गई है. भाजपा के तमाम नेता यह सोच कर जनता के बीच नहीं जा रहे हैं कि कहीं जंतर मंतर आंदोलन में युवाओं पर हुई पुलिस बर्बरता और हिंसा का गुस्सा जनता उन पर न उतार दे.

मोदी सरकार ने बातचीत का भरोसा दिया है, लेकिन देश के राजनीतिक इतिहास में केवल आश्वासन और वास्तविक समाधान के बीच का अंतर भी कम नहीं रहा है. इसलिए अब आंदोलन के नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता का विश्वास बनाए रखते हुए सरकार के हर कदम पर सतर्क निगाह रखे.

वांगचुक ने अनशन समाप्त किया है, लेकिन आंदोलन समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई है. उलटे, कॉकरोच जनता पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कहा है कि उनका विरोध जारी रहेगा. स्पष्ट है कि आंदोलन अब ‘संवाद और दबाव’ की दोहरी रणनीति पर आगे बढ़ेगा. कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके का कहना है – ‘हमें राहत है कि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है. लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता दीपक बालियान ने भी कहा है कि 20 छात्रों की जान चली गई. धर्मेन्द्र प्रधान का जब इस्तीफा होगा तभी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होगी. तब तक वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तब तक यह प्रोटेस्ट जारी रहेगा. Sonam Wangchuk

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