NEET Issue: कांग्रेस 2024 के बाद युवा मुद्दों पर बोल तो रही है लेकिन हर छात्र प्रोटेस्ट की लीड नहीं ले रही. पार्टी का तर्क है कि अगर नेता सीधे स्टेज पर चले जाएंगे तो आंदोलन को कांग्रेस का प्रोटेस्ट कहकर बदनाम कर दिया जाएगा इसलिए MP संजय सिंह, IYC के नेता और NSUI कार्यकर्ता जंतर-मंतर गए, पर राहुल गांधी खुद नहीं गए.

CJP एक नॉन-पॉलिटिकल, यूथ-लेड मूवमेंट है. इसके फाउंडर अभिजीत दिपके ने बार-बार कहा है कि ये किसी पार्टी का मंच नहीं है. राहुल गांधी के जाने से आंदोलन का नॉन पोलिटिकल नैरेटिव कमजोर पड़ जाता इसलिए अब तक दोनों तरफ से दूरी बनी रही.

राहुल गांधी संसद में NEET मुद्दा उठा चुके हैं और उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों के समर्थन में पोस्ट भी की है इसके बावजूद अब तक यह माना जा रहा था की कांग्रेस पार्टी या राहुल गाँधी इस पूरे आंदोलन को जानबूझकर इग्नोर कर रहे हैं लेकिन 21 जुलाई 2026 को राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी पीएम हॉउस के पास शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए धरने पर बैठ गये. यह बिलकुल अप्रत्याशित घटना थी.

किसी को कानों कान खबर तक नहीं लग पाई और राहुल गाँधी ने पूरे प्रोटेस्ट को ताकत दे दी. अब तक कांग्रेस का स्टैंड यह था कि सड़क पर NSUI और संसद में राहुल गाँधी. सीधे प्रोटेस्ट में जाने से सिक्योरिटी, परमीशन और कंट्रोवर्सी बढ़ती है इसलिए बैकएंड से सपोर्ट किया जाये तो सही लेकिन राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी अचानक सभी को सरप्राइज्ड कर दिया.

आपको क्या लगता है? राहुल गांधी को इस तरह फ्रंट पर आना चाहिए था या आंदोलन से दूरी बनाये रखना ही ठीक था? NEET Issue

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