Manipur Tourism: मणिपुर राज्य अपने नाम के अनुरूप भारतवर्ष की अनमोल मणि जैसा अतुलनीय गहना है जिस की स्वर्णिम आभा से यह देश सुशोभित और अलंकृत है. मणिपुर को रत्नों की भूमि यानी लैंड औफ ज्वैल्स भी कहा जाता है. प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, हरीभरी पर्वतमालाओं से अलंकृत, समृद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत अपने अंतर में समाए मणिपुर पर्यटकों के स्वागतसत्कार के लिए आतुर है.

अफसोस यह है कि कुछ समय से यह स्वर्णिम प्रदेश जातीय संघर्ष के चलते अशांत बना हुआ है. इसी वजह से पर्यटकों की आवाजाही न के बराबर हो गई है. उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि केंद्र व राज्य सरकारों तथा स्थानीय लोगों के सार्थक प्रयासों से प्रदेश शांति व समृद्धि की राह पर शीघ्र वापस लौटेगा और देशविदेश के पर्यटक बिना किसी रोकटोक के यहां के मनभावन पर्यटक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे.

मणिपुर के प्रमुख र्यटन स्थल

इंफाल : मणिपुर की राजधानी इंफाल है. इंफाल शहर व उस के आसपास कई ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है.

कंगला फोर्ट : कंगला फोर्ट एवं महल इंफाल शहर के केंद्र में स्थित है. इस किले का समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास है. यह किला मणिपुर साम्राज्य एवं मैतेई शासकों की शाही गद्दी व राजनीतिक सत्ता और शक्ति का केंद्र था. वर्ष 1891 तक यह किला मैतेई राजघराने का आवास रहा है. किले की बनावट व उस की संरचना में स्थानीय मैतेई, हिंदू व यूरोपियन स्थापत्य शैलियों का शानदार संगम है.

इंफाल युद्ध संग्रहालय : इंफाल युद्ध संग्रहालय में द्वितीय विश्वयुद्ध से संबंधित पुरावशेषों को प्रदर्शित किया गया है. इतिहास के विद्यार्थी व इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटक इस संग्रहालय का भ्रमण अवश्य करें.

मणिपुर राज्य संग्रहालय : मणिपुर राज्य संग्रहालय राज्य के समृद्ध इतिहास, पुरातत्व एवं स्थानीय पारंपरिक कलाओं का दिग्दर्शन कराता है. संग्रहालय का उद्घाटन

25 सितंबर, 1969 को हुआ था. संग्रहालय में पारंपरिक परिधान, ऐतिहासिक पुरावशेष, अस्त्रशस्त्र, पारंपरिक वाद्ययंत्र, मणिपुर के शासकों के चित्र, कलाकृतियां, दैनिक उपयोग की सामग्रियां आदि प्रदर्शित हैं. संग्रहालय सोमवार, द्वितीय शनिवार व राजपत्रित अवकाशों को छोड़ कर सुबह 10.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक खुला रहता है. संग्रहालय में प्रवेश शुल्क प्रति वयस्क 10 रुपए, बच्चों का 5 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 50 रुपए है.

मार्जिंग पोलो कौम्पलैक्स : यह पर्यटन स्थल मणिपुर की राजधानी इंफाल से 10 किलोमीटर दूर स्थित है. मार्जिंग पोलो कौम्पलैक्स आधुनिक पोलो खेल के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है. ऐसी मान्यता है मणिपुर में सागोल कांगजई खेल के रूप में आधुनिक पोलो सैकड़ों साल पहले से खेला जा रहा था.

वर्ष 2009 में बनाए गए इस परिसर में एक सर्वसुविधायुक्त पोलो ग्राउंड है. साथ ही, परिसर में पोलो खिलाड़ी की 122 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. यह केवल एक खेल परिसर ही नहीं बल्कि राज्य की प्राचीन खेल परंपरा का जीवंत स्मारक भी है.

मणिपुर के लोकप्रिय उत्सव व पर्व

शिरूई लिलि महोत्सव : शिरूई लिलि महोत्सव मणिपुर का सब से खास व लोकप्रिय राजकीय वार्षिक सांस्कृतिक पर्यटन उत्सव है जो मईजून माह

में उखरुल जिले में आयोजित किया जाता है. इस महोत्सव में राज्य के राजकीय फूल शिरुई लिलि की अनुपम छटा पर्यटकों को सम्मोहित कर देती है. यह दुर्लभ फूल वर्ष 1946 में खोजी गई शिरुई की पहाडि़यों में ही पाया जाता है.

लाई हराओबा उत्सव : लाई हराओबा उत्सव मणिपुर की सांस्कृति विरासत का अभिन्न अंग है. मैतेई जनजाति द्वारा मनाया जाने वाला यह लोकप्रिय पारंपरिक पर्व है.  उत्सव के दौरान पारंपरिक लाई हराओबा नृत्य, सुगीत भी आयोजित किए जाते हैं. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला यह उत्सव फरवरी से जून महीनों के बीच मनाया जाता है. मणिपुर की रासलीला : जागोई रास के नाम से प्रसिद्ध मणिपुर की रासलीला भारत के 8 शास्त्रीय नृत्यों में से एक है. इस में कृष्ण व गोपियों के शाश्वत अनुराग को नृत्य की भावभंगिमाओं व मुद्राओं में प्रदर्शित किया जाता है. सामान्यतया यह नृत्य पूर्णिमा की रात को मंदिरों के समक्ष किया जाता है.

उपरोक्त पर्यटन स्थलों के अलावा मणिपुर में जिला विष्णुपुर में विष्णु का ईंट निर्मित मंदिर, थारोन गुफा, नागरकुल, चुराचांदपुर, जुकोह घाटी, लीमाराम फौल आदि पर्यटन स्थलों का भी समय व सुविधानुसार पर्यटक भ्रमण किया जा सकता है. Manipur Tourism

 

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