Emotional Stories: अमन ने एक झटके से टीवी को रिमोट से बंद किया और रिमोट को टेबल पर पटक दिया. कुछ गिरने से अंदर वाले कमरे में सोई आराधना की नींद अचानक खुल गई. उस ने जल्दी से अपने पास पड़े मोबाइल में टाइम देखा. अढ़ाई बजने को थे. उस ने लाइट जलाई और उठ कर बाहर वाले कमरे में आ गई.
अमन सोफे पर हाथों से सिर को पकड़े बैठा था. आराधना उस के पास आ कर बैठी और धीरे से उस की पीठ सहलाने लगी. उस दिन 20 अप्रैल के अखबार में प्रकाशित एक फैनीवाले की खबर पढ़ी थी कि उस ने पहलगाम की उस घटना को कैसे ?ोला था.
‘‘क्या हुआ, आज फिर नींद नहीं आ रही क्या?’’ उस ने बहुत ही प्यार से पूछा.
‘‘मम्मी, ये सब क्या हो रहा है, क्या ऐसी यादें बनाने गए थे हम पहलगाम, क्या सोचा था और क्या हुआ है
यह सब?’’
‘‘पहले से तो बेटा कुछ भी पता नहीं होता, अगर ऐसा होता तब तो समूचे संसार से दुर्घटना शब्द ही गायब होता.’’
‘‘पर मम्मी, जो उस अनहोनी और अमानवीय घटना के पात्र बने हैं, अभी डेढ़ माह भी नहीं बीते, इन के प्रति तो जैसे समाज की नजरें ही बदल गई हैं. लोग यह देख रहे हैं कि कैसे अपने पति को खोने पर यह औरत अभी तक जिंदा लाश में क्यों नहीं बदल गई, इस ने लिपस्टिक क्यों लगाई है और क्यों ये पत्नियां ऐसा कह रही हैं कि हम इस का बदला तो जरूर चाहते हैं पर साथ ही, हम यह भी चाहते हैं कि किसी एक विशेष समुदाय से नफरत न की जाए, इन्हीं बातों से लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया है.
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