Fiber Rich Diet: शरीर के 90 फीसदी हैप्पी हार्मोंस हमारे पाचनतंत्र से ही बनते हैं. क्या आप ने महसूस किया है कि जिस दिन आप का पेट ठीक नहीं होता उस दिन हमें अच्छा महसूस नहीं होता. यदि लंबे समय तक पेट में कब्ज की शिकायत हो या पाचन से संबंधित परेशानियां आ रही हों तो इस का असर हमारे मूड, स्किन और एनर्जी लैवल पर भी पड़ता है. इस के लिए अपनी गट हैल्थ का ध्यान रखना आवश्यक है.
जब हमारी गट हैल्थ खराब होती है तो इस से डिप्रैशन, चिंता और मूडस्ंिवग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं क्योंकि पाचनतंत्र और दिमाग का सीधा कनैक्शन होता है जिसे ब्रेन गट कनैक्शन कहा जाता है. इस में गट में मौजूद माइक्रोबायोम एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जब इन का संतुलन बिगड़ता है तब मन पर भी इस का असर पड़ता है.
शरीर को हैल्दी रखने के लिए गट हैल्थ यानी आंतों की सेहत का खयाल रखना बेहद जरूरी है. हमारी आंतों (गट) में करोड़ों बैक्टीरिया होते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है. यदि हमारी गट हैल्थ अच्छी होती है तो खाना अच्छे से पच जाता है और पोषक तत्त्व शरीर में सही तरह से एब्जौर्ब हो जाते हैं. दूसरी ओर जब हमारे गट में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है तो इसे डिस्बायोसिस कहते हैं, जिस से पेट खराब होना और मैंटल हैल्थ (तनाव व चिंता) से जुड़ी समस्याएं पैदा होने लगती हैं. यानी, हमारी डाइट और लाइफस्टाइल की छोटीछोटी आदतों का असर हमारे गट हैल्थ पर पड़ता है. गट के बैक्टीरिया हमारी भावनाओं और तनाव को प्रभावित कर सकते हैं जिस की वजह से एंग्जाइटी और डिप्रैशन जैसी मैंटल परेशानियां पैदा हो सकती हैं. सो, अच्छी गट हैल्थ के लिए 3 एफ का नियम बनाएं. 3 एफ का यहां मतलब है- फाइबर युक्त डाइट, फर्मेन्टेड फूड और फास्ंिटग.
फाइबर युक्त डाइट
फाइबर अच्छे पाचन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है. यह हमारी पाचनक्रिया के सुचारुरूप से काम करने के लिए बहुत आवश्यक होता है. फाइबर सिर्फ पाचन में ही नहीं बल्कि शरीर को कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है. शरीर में फाइबर पेट के अंदर मौजूद गुड बैक्टीरिया को पोषण देने से ले कर आंतों को साफ रखने और मेटाबौलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है.
फाइबर कोलैस्ट्रौल को कम कर दिल की सेहत को बेहतर रखने में मदद करता है. फाइबर ब्लड शुगर को अचानक से बढ़ने नहीं देता, जिस वजह से डायबिटीज का खतरा कम होता है. यह वजन कम करने में भी मदद करता है, जिस से मोटापे से बचाव किया जा सकता है. इस के अलावा कब्ज जैसी समस्या से राहत दिलाने में भी फाइबर आप की मदद करता है. जानें कि फाइबर युक्त चीजें खाने में कैसे शामिल करें.
द्य दालें, काली बीन्स, छोले, राजमा और अन्य फलियां फाइबर का भंडार होती है.
द्य सब्जियां फाइबर का बेहतरीन स्रोत होती हैं. कुछ विशेष रूप से अच्छी उच्च फाइबर वाली सब्जियां ये हैं- ब्रोकली, गाजर, चुकंदर, शकरकंद आदि.
द्य अधिकांश फलों में फाइबर होता है. केले फाइबर का एक बड़ा स्रोत है और यह पोटैशियम जैसे आवश्यक विटामिन व खनिज भी प्रदान करता है लेकिन कुछ और फल विशेष रूप से अच्छे स्रोत हैं- सेब, चीकू, नाशपाती, बेरीज, ब्लैकबेरी और स्ट्रोबेरी. इन्हें दही या स्मूदी में आसानी से मिलाया जा सकता है. फाइबर से भरपूर इन फलों को छिलके सहित खाना सब से अच्छा होता है, क्योंकि छिलकों में फाइबर की मात्रा काफी होती है.
द्य एवोकाडो में फाइबर और स्वस्थ वसा प्रचुर मात्रा में होता है, जिस से यह सलाद, टोस्ट और स्मूदी के लिए एक बढि़या विकल्प है.
द्य साबुत अनाज आप के आहार में फाइबर जोड़ने का एक शानदार तरीका है. क्विनोआ, दलिया उच्च फाइबर वाले अनाजों में से एक हैं जो पूर्ण प्रोटीनयुक्त भी हैं.
द्य ओट्स अपने फाइबर तत्त्व के लिए जाना जाता है. नाश्ते के लिए यह एक लोकप्रिय विकल्प है. इस का इस्तेमाल ओटमील, बेक्ड सामान या स्मूदी में भी किया जा सकता है.
द्य ब्राउन चावल और जौ अनाजों में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है और इन्हें
विभिन्न प्रकार के व्यंजनों, जैसे स्टर-फ्राई से ले कर सूप तक, के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
द्य चिया सीड्स में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है और इसे दही या दूध में, किसी जूस के ऊपर स्प्रिंकल कर सकते हैं. इसे स्मूदी में मिलाया जा सकता है या चिया पुडिंग बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
द्य मेवे और बीज फाइबर के साथसाथ स्वस्थ वसा और प्रोटीन के भी अच्छे स्रोत हैं.
द्य अलसी सीड्स उच्च फाइबर वाले बीज हैं और इन्हें अनाज, सलाद या स्मूदी में जोड़ा जा सकता है.
द्य बादाम और पिस्ता जैसे उच्च फाइबर वाले मेवे नाश्ते के लिए बहुत अच्छे होते हैं. अतिरिक्त पोषण के लिए इन्हें व्यंजनों में भी मिलाया जा सकता है.
फर्मेन्टेड फूड
ऐसा भोजन जिसे पकाने के लिए चूल्हा या तेज तापमान नहीं, बल्कि खमीरी प्रक्रिया से गुजारा जाता है. जो खाद्य पदार्थ खमीर प्रक्रिया से गुजरते हैं, उन्हें फर्मेंटेड फूड कहा जाता है. फर्मेंटेशन के प्रोसैस में खाने में हैल्दी बैक्टीरिया पनपते हैं, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. बता दें कि इन बैक्टीरिया को प्रोबायोटिक्स भी कहा जाता है जो गट हैल्थ और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं.
फर्मेंटेड फूड गट हैल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इन में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन में सुधार करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत करते हैं, जैसे इडली, डोसा, दही, याकुल्ट, अचार, ढोकला या खमीरी रोटी आदि.
फास्टिंग
फास्टिंग का अर्थ है अपने पेट को कुछ समय के लिए खाने से आराम देना. बेहतर पाचन के लिए डिनर और नाश्ते के बीच 12-14 घंटे का फास्ट जरूरी है. लगातार खाते रहने से पाचनतंत्र को आराम नहीं मिलता. यदि आप बेहतर डाइजेशन चाहते हैं तो फास्ंिटग एक बेहतर विकल्प है.
फास्टिंग के समय भारी और गरिष्ठ फूड लेने से बचें. हलका और सुपाच्य भोजन करें, जैसे वैजिटेबल सूप, फ्रूट्स, सलाद आदि. फास्ंिटग करने से पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम मिलता है. अगर आप लंबे समय से पाचन की समस्या से परेशान हैं तो फास्ंिटग करने से आप की यह समस्या कम हो सकती है.
फास्टिंग के फायदे
द्य रात का भोजन जल्दी करें, इस से पाचनतंत्र बेहतर होता है.
द्य वजन नियंत्रित रहता है.
द्य यह तनाव और चिंता को कम करने में भी मदद करता है.
द्य फास्टिंग से शरीर का मेटाबौलिज्म स्लो होता है, जिस से शरीर को सफाई करने का समय मिलता है और शरीर से विषैले पदार्थ दूर होते हैं.
द्य शरीर फिजिकली और मैंटली दोनों तरीकों से रिलैक्स होता है.
यदि आप किसी बीमारी से पीडि़त हैं और आप का इलाज चल रहा है तो अपने डाक्टर से परामर्श करने के बाद ही फास्ंिटग करें. धार्मिक उपवास को फास्ंिटग न समझें क्योंकि उस के बाद जम कर तला खाना अमूमन खा लिया जाता है. धार्मिक उपवास स्वास्थ्य की दृष्टि से नहीं बनाए गए हैं. ये गृहस्थों को अपना खाना पुजारियों को देने के लिए बनाए गए हैं.
अच्छी गट हैल्थ पाएं
खाने में शुगर की मात्रा कम करें : खाने में अधिक शुगर होने की वजह से गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं, जिस वजह से हानिकारक बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ने लगती हैं. सो, शुगर कम खाएं.
तनाव कम करें : तनाव होते ही सब से पहला प्रभाव हमारी गट हैल्थ पर पड़ता है. कई बार पेट अच्छे से साफ नहीं होता और कब्ज या कौन्स्टिपेशन की समस्या हो जाती है. इसलिए यह सम?ा जा सकता है कि मैंटल हैल्थ और गट हैल्थ के बीच गहरा रिश्ता है. तनाव अधिक होने की वजह से गट माइक्रोबायोम बिगड़ सकता है. स्ट्रैस कम करने के लिए ऐक्सरसाइज, डीप ब्रीदिंग, वाकिंग, रनिंग, जौगिंग आदि की मदद लें. ओवरईटिंग न करें : रात के समय में आप ओवरईटिंग न करें. इस से आप की पाचनक्रिया पर दबाव पड़ता है और आप को पेट संबंधी समस्या हो सकती है.
खाने में करें शामिल : खाने में हैल्दी फूड आइटम्स, जैसे हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल, दूध, दही आदि को शामिल करें. ज्यादा नमक, तेल और चीनी वाले खाने से भी बचें. जंक फूड या प्रोसैस्ड फूड हमारे गट के माइक्रोबायोम को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिस से पाचन में परेशानी हो सकती है.
प्रोबायोटिक खाएं : प्रोबायोटिक्स गट में मौजूद माइक्रोब्स की हैल्दी ग्रोथ के लिए जरूरी होते हैं, इसलिए अपनी डाइट में प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाना, जैसे दही रोज खाएं. इस से आप के गट बैक्टीरिया हैल्दी रहेंगे. ऐक्सरसाइज करें : ऐक्सरसाइज करने से आप का पाचनतंत्र और मैंटल हैल्थ दोनों ठीक रहते हैं, इसलिए रोज 30 से 40 मिनट ऐक्सरसाइज करें. इस से आप की सेहत को काफी फायदा होगा और आप का मूड भी बेहतर रहेगा. Fiber Rich Diet





