Healthy Diet: अंडा खाने वाले खाते ही हैं, चटकारे ले कर. अंडा करी हो, भुरजी हो, अंडा सलाद हो. सभी को स्वादिष्ठ लगता है. इसे अकेले ही उबाला, तला, भूना जा सकता है. यह किसी बड़े व्यंजन का हिस्सा हो सकता है- औमलेट, सलाद, बेकन, पनीर, हरी मिर्च, काली मिर्च और नमक के साथ.

लेकिन कुछ लोग खातेखाते भी इलजाम लगाएंगे कि असली अंडा तो देसी मुरगी का होता है. पोल्ट्री फार्म का अंडा तो नकली होता है. दवाएं, एंटीबायोटिक, हार्मोंस वगैरह मुरगियों को दे कर उत्पादन किया जाता है. गाड़ी ले कर शहर में देशी अंडा ढूंढ़ते रहेंगे लेकिन पड़ोस की दुकान में सस्ता अंडा मिल रहा है, उसे मशीन से निकाला हुआ समझ कर नहीं लेंगे.

यह समझसमझ का फर्क है. मुझे समझते हुए एक समय निकल गया कि दोनों में कोई फर्क नहीं होता. दोनों बराबर हैं. अंतर है तो सिर्फ उत्पादन क्षमता का. यह आनुवंशिकता का कमाल है जो वैज्ञानिकों ने मुरगियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाई है ताकि मुरगीपालन करने वाले किसानों को आर्थिक लाभ मिल सके. इसलिए आप तो अंडे के व्यंजन खाते रहो. आप को बराबर मात्रा में पोषक तत्त्व मिलते रहेंगे. इस से सस्ता प्रोटीन आहार कहां मिलेगा. 60 ग्राम के अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन. इस प्रोटीन का जैव मूल्य लगभग 94 प्रतिशत है. इस से अधिक 100 प्रतिशत जैव मूल्य सिर्फ मां के दूध में ही होता है.

प्रतिदिन आप के शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से एक ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है और पोल्ट्री फार्म का अंडा लगभग एक रुपए प्रति एक ग्राम प्रोटीन के बराबर कीमत में बाजार में मिलता है. इतनी सरल गणित में आप अपने परिवार के सदस्यों को सस्ता प्रोटीन आहार दे सकते हैं. इस से महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर हो सकता है.

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