Happy New Year 2026 : फेस्टिवल को मिलजुल कर मनाने में ही सब की भलाई होती है. इन को समय, देश और समाज की सीमाओं में बांध कर नहीं देखना चाहिए. नए साल का पूरी दुनिया में महत्व है. इस महत्व को कमतर करना उचित नहीं है.
21 सितंबर, 2025 को इंदौर में गरबा शुरू होने के पहले ही बवाल शुरू हो गया. नवरात्रि महोत्सव में पंडालों में गरबा का आयोजन होता है. भाजपा पार्षद मनीष मामा ने कहा कि यह देवी की आराधना का पर्व है. हमारे कार्यक्रमों अलीम, कलीम पर प्रतिबंध है. यदि वह अपने परिवार और अम्मी, अब्बा के साथ आते हैं तो स्वागत है. इसलाम में मूर्ति पूजा बैन है तो मुसलिम लड़के गरबे में क्या करने आते हैं? यदि वह यहां पर बहनों को परेशान करने के लिए आएंगे तो उन्हें शरीयत की सजा मिलेगी. मुसलिम महिला पार्षद रूबीना खान ने एक वीडियो जारी कर कहा ‘मुसलिम समाज के लड़कों को गरबा देखने के लिए नहीं जाना चाहिए. कोई भी संगठन यदि मुसलिम समाज के बालकों के साथ में मारपीट करेगा तो यह न तो उन के मातापिता को अच्छा लगेगा न ही उन के समाज के लोगों को. इसलिए वे उस जगह नहीं जाएं जहां पर उन्हें नहीं जाना चाहिए.
28 सितंबर, 2025 को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर स्थित रंजना कैफे में कुछ युवा पार्टी का आयोजन कर रहे थे. इस बीच बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा कर जम कर युवाओं के साथ मारपीट और तोड़फोड़ करने लगे.
25 दिसंबर 2025 को हरियाणा के हिसार में बजरंग दल ने क्रिसमस के दिन चर्च के सामने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया. बजरंग दल का तर्क था कि चर्च के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की अनुमति है. यह केवल एक जगह की घटना नहीं है. लखनऊ में चर्च के सामने मेफेयर सिनेमा के तिराहे पर हनुमान चालीसा का पाठ हुआ. क्रिसमस के रंग में भंग डालने का काम किया गया.
खुशियों को किसी एक देश की सीमा में नहीं बांधा जा सकता है. बजरंग दल के लोगों ने अपनी कट्टरता से त्यौहारों में कसैलापन भर दिया है. क्रिसमस के मौके पर चर्च के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने, दीवाली पर मुसलिम इलाकों में पटाखे फोड़ने, होली पर मसजिद चर्च पर रंग फेंकने, क्रिसमस पर सांटा की टोपी पहनने पर विवाद खड़े करना शुरू कर दिया है. गरबा और गणेश पूजा के पंडालों में गैर हिंदुओं को घुसने से मना करने का काम होने लगा है.
ऐेसे में जिस तरह से भारत में मुसलिमों के साथ हो रहा उस की प्रतिक्रिया में दूसरे देशों में हिंदुओं के साथ व्यवहार हो रहा है. बंगलादेश की सरकार में गृह मामलों के सलाहकार और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने ऐलान किया है कि अब से बंगलादेश में अजान के समय हिंदू पूजापाठ करना और लाउडस्पीकर पर भजन सुनने पर पाबंदी रहेगी. जो इस कानून को तोड़ेगा उस को सजा मिलेगी.
धार्मिक रीति रिवाज वाले त्योहार धर्म और जाति के बीच तनाव फैलाने का काम करते हैं. ऐसे में पूरी दुनिया को वह त्योहार मनाने चाहिए जहां लोग एक दूसरे की खुशियां में बिना किसी आडंबर के शामिल हो सके.
नए साल की खुशियों का फैलता दायरा
नए साल की उमंग ऐसी है कि बिना किसी धार्मिक कट्टरता के इस को मनाया जाता है. जनवरी में लगने वाला साल अंग्रेजों का है. नया साल पूरी दुनिया में मनाया जाता है. इस नए साल को मनाने की शुरूआत सीधे तौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर से जुड़ी हुई है. इस को आज दुनिया के लगभग सभी देश अपनाते हैं. इस की शुरुआत रोमन सभ्यता से मानी जाती है. प्राचीन रोम में पहले नया साल मार्च महीने से शुरू होता था लेकिन समय के साथ इस में बदलाव तब से यह जनवरी में मनाया जाता है.
रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने कैलेंडर में सुधार करते हुए जनवरी महीने को साल का पहला महीना घोषित किया था. इस के बाद में 1582 में आठवें पोप ग्रेगरी ने इस में और सुधार कर ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया. जिसे आज का आधुनिक कैलेंडर माना जाता है. तभी से 1 जनवरी को विश्वभर में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है. एक दौर था जब पूरी दुनिया में अंग्रेजों का राज था. उन का सरकारी काम इसी कैलेंडर से चलता है तो यह नया साल सब मनाते हैं.
बात केवल नए साल की ही नहीं है आर्थिक साल यानि फाइनेंशियल ईयर भी पूरी दुनिया एक सा ही मनाती है. भारत में आर्थिक साल फाइनेंशियल ईयर यानि वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है और अगले साल 31 मार्च को खत्म होता है. इस की शुरूआत ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है. इस का संबंध मुख्य रूप से खेती और उस से मिलने वाली लगान से जुड़ी है. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का प्रमुख योगदान है. फसल चक्र कटाई के बाद कर वसूली से मेल खाता था.
ब्रिटिश सरकार ने 1867 में इसे अपनाया था. आजादी के बाद भी इसे बदला नहीं गया और यह भारत के प्रशासनिक और कर प्रणाली का हिस्सा बन गया. इस तरह से दो नए साल होते हैं. एक पब्लिक के लिए है जो जनवरी से दिसंबर तक चलता है और दूसरा वित्तीय साल है जो कर प्रणाली से जुड़ा है. इन दोनों का जुड़ाव पूरी दुनिया से होता है तो इस को बदलना सही काम नहीं है. जिस तरह से समय, नवंबर और खुशियों की गणना को अलगअलग खांचे में नहीं रखा जा सकता यह जाति, धर्म और देश की सीमाओं से परे है उसी तरह से कई त्योहार फेस्टिवल ऐसे हैं जो देश की सीमाओं को तोड़ पूरी दुनिया में मनाए जाते हैं.
जाति, धर्म और देश की सीमाओं से बाहर निकले यह त्योहार :
नए साल और आर्थिक साल की तरह से कई ऐसे त्योहार जो पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांधने का काम कर रहे हैं. यह सीमाएं तोड़ कर मनाए जा रहे हैं. फरवरी माह में मनाया जाने वाला वैलेंटाइन डे भी बेहद खास है. 14 फरवरी को मनाया जाने वाला वैलेंटाइन डे दुनिया भर में प्यार और रिश्तों का जश्न मनाने का एक तरीका है. यह रिश्ता चाहे वह रोमांटिक हो, दोस्ती का हो या परिवार का हो. प्यार और स्नेह के इस दिन लोग अपने प्रियजनों को कार्ड, फूल और उपहार दे कर अपने प्रेम का इजहार करते हैं.
यह प्रेम, दोस्ती और रिश्ते के उत्सव का प्रतीक बन गया है. इस में पूरे सप्ताह वैलेंटाइन वीक के रूप में 7 से 14 फरवरी के बीच मनाया जाता है. इन को रोज डे, टेडी डे, प्रामिस डे जैसे क्रम में बांटा गया है. लोग एक दूसरे को गुलाब के फूल, चाकलेट, ग्रीटिंग कार्ड और उपहार देते हैं. लोग डिनर, मूवी या कहीं घूमने जाते हैं. यह किसी जाति धर्म और देश की सीमा में नहीं बंधा है.
असल में यह त्योहार मानव जाति से जुड़ गए हैं. ऐसा ही है रंगों का त्योहार होली. वैसे तो यह भारत का प्रमुख त्योहार है. इस के बाद भी पूरी दुनिया में जिन लोगों को रंग अच्छे लगते हैं उन को रंगों का त्योहार होली बहुत पसंद आता है. अब रंगों से जुड़े कई आयोजन पूरी दुनिया में होते हैं. इस का बहुत छोटा सा हिस्सा धर्म के जुड़ा है जिस को कम संख्या में लोग मनाते हैं. ज्यादातर लोग होली को रंगों के त्योहार के लिए मनाते हैं. इस त्योहार में बिना किसी भेदभाव के रंग खेलने की जो आजादी है वह किसी और त्योहार में नहीं है.
मेलजोल को बढ़ावा देते त्योहार :
होली गिलेशिकवे भूल कर आपसी भाईचारा निभाने का त्योहार है. रंग जीवन में खुशी और उल्लास भरने का काम करते हैं. सभी धर्म के लोग इस का मनाते हैं. होली में बधाई संदेश से ले कर मिठाई, नमकीन और गुझिया का खाने में आनंद लिया जाता है. अब भारत से बाहर भी अमेरिका, मौरीशस, फिजी और नेपाल जैसे कई देशों में यह मनाया जाता है. इस में रंगों के साथ गीतसंगीत और खानपान का उल्लास होता है.
आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने वाले त्योहारों में होली जैसा ही त्योहार ईद होता है. इस के धार्मिक पक्ष से इतर इस का दूसरा रूप सदभाव को बढ़ाने वाला है. ईद मिलन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है. यह आपसी सद्भाव को बढ़ावा देते हैं. यह एकता और और भाईचारे का प्रतीक हैं. लोग किसी भी धर्म के हों, एक साथ आकर खुशियां मनाते हैं. एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं. गुलाब बरसाते हैं सेवई और बिरयानी का आनंद लेते हैं. विदशों से इस को देखने लोग जयपुर, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों में देखने आते हैं.
जिस तरह से होली और ईद है उसी तरह से रोशनी का त्योहार दीवाली भी है. एक तरह से देखें तो यह फेस्टिवल सीजन की शुरूआत जैसी होती है. दिवाली सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देशों में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है. जिन जगहों पर भारतीय लोग बड़ी संख्या में रहते हैं जैसे अमेरिका, कनाडा, यूके, सिंगापुर, मलेशिया, मौरीशस, फिजी, नेपाल, श्रीलंका, गुयाना, सूरीनाम और त्रिनिदाद एंड टोबैगो वहां इस का भव्य आयोजन होता है.
लोग अपने घरों को दीपों, मिठाइयों व रंगोली से सजाते हैं. मुसलिम बहुल देश होने के बावजूद इंडोनेशिया में दिवाली को सांस्कृतिक महत्व है. दिवाली दुनिया भर में एकता, प्रकाश और सकारात्मकता का संदेश देने वाला त्योहार बन चुका है. जो विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों को जोड़ती है. इस दिन बाजारों में खरीददारी होती है. लोग एक दूसरे को उपहार देते हैं. मिठाई, मेवे और नमकीन की खरीददारी होती है. भारत के कई शहरो में रोशनी देखने लोग दूरदूर से आते हैं.
होली, ईद और दीवाली जैसा ही त्योहार हो गया है क्रिसमस. अब इस को केवल ईसाई धर्म के मानने वाले ही नहीं मनाते पूरी दुनिया में यह उल्लास भरने का काम करता है. क्रिसमस ईसाई धर्म मानने वालों का त्योहार है. अब पूरी दुनिया इस का उल्लास के साथ मनाती है. चर्च के बाहर बाजार सज जाते हैं. बड़ी संख्या में गैर ईसाई यहां आते हैं. 24 दिसंबर की आधी रात से ही यह आयोजन शुरू हो जाते हैं. लोग घरों में क्रिसमस ट्री सजाते हैं. सेंटा वाली टोपी लगा कर बच्चे मजे करते हैं. तरहतरह के केक कटते हैं.
कुछ त्योहार पूरी दुनिया को एकजुट करने और उल्लास मनाने का मौका देते हैं. नए साल का उत्सव भी इसी तरह का है. दुनिया भर के देशों में अलगअलग तरह के नए साल भी मनाए जाते हैं. ग्लोबल रूप से जनवरी में शुरू होने वाले नए साल का उल्लास देते हैं. खुशियां को सब के साथ बांटने का काम करना चाहिए. इन को किसी सीमा में बांधना अच्छा नहीं होता है. त्योहार पूरे साल आपसी एकजुटता का संदेश देते हैं. इन को मिलजुल कर मनाने में देश और समाज का भला होता है. Happy New Year 2026 :





