Happy New Year 2026 :

तुम्हारी भाषा, तुम्हारा धर्म, तुम्हारा देश, ये पहचाने हैं. तुम्हारा अस्तित्व इन सब से बड़ा है - खलील जिब्रान

सच्ची वैश्विकता तब शुरू होती है जब तुम हम और वे कहना छोड़ देते हो - ओशो

सचमुच में दुनिया भर के लोग अगर किसी दिन अपने स्वतंत्र अस्तित्व को महसूसते हैं तो वह नए साल का पहला दिन होता है. सच्ची वैश्विकता का एहसास भी इसी दिन होता है. क्योंकि इस दिन दिलोदिमाग पर न धार्मिक पाखंड होते हैं न कुछ करने और कुछ न करने का बोझ होता है, न कोई कलश यात्रा न जुलुस, न व्रत त्यौहार, न पूजापाठ न, कोई नमाज और न ही किसी विशेष प्रार्थना का आयोजन होता.

साल भर ऊपर वाले के आगे गिड़गिड़ाते रहने वाले नए साल के पहले दिन मंदिर, मसजिद या गिरजाघरों में जा कर अपने लिए कुछ नहीं मांगते और अगर मांगते भी हैं तो यही कि पूरा साल अमन चैन शांति और भाईचारे से गुजरे. हम कोई दंगा फसाद, विवाद झगड़ा और हिंसा नहीं चाहते. साल के पहले दिन हम कामना करते हैं कि 2026 सभी के लिए सुख, शांति, स्वास्थ, सम्पत्ति, वैभव और शुभ ले कर आएं. यह भावना जिन 3 शब्दों में समाई है वे हैं हैप्पी न्यू ईयर.

यह ठीक है कि कुछ दिन बाद अधिकतर लोग फिर से धर्म का लबादा ओढ़ने मजबूर हो जाते हैं और हैप्पी न्यू ईयर की जगह हैप्पी होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस वगैरह ले लेते हैं जो सारे फसाद और परेशानियों की जड़ हैं. हर दिन एक जनवरी जैसा खुशनुमा गुजरे इस के लिए जरुरी सिर्फ इतना है कि हम हर कभी एक जनवरी सरीखा माहौल अपने चारों तरफ बनाए. इस के लिए भी जरुरी यह है कि हम धार्मिक त्यौहार मनाना छोड़ें जो असमानता, फूट और नफरत फैलाते हैं.

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