दक्षिण अफ्रीका की क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके ग्रीम स्मिथ जब जगमोहन डालमिया सालाना कौन्क्लेव में हिस्सा लेने भारत आए तो उन्होंने माना कि टैस्ट क्रिकेट में इस्तेमाल की जाने वाली गेंद की क्वालिटी का रोल बड़ा ही अहम होता है.

शुक्रवार, 2 नवंबर, 2018 को आयोजित हुई इस कौन्क्लेव में ग्रीम स्मिथ का मानना था कि लाल गेंद के इस खेल में कूकाबुरा गेंद टैस्ट क्रिकेट को खत्म कर रही है.

ग्रीम स्मिथ ने बताया, ‘‘कूकाबुरा गेंद खेल को मार रही है. मैं अपनी राय रखूं, तो टैस्ट क्रिकेट में गेंद बहुत बड़ा मुद्दा है.’’

ग्रीम स्मिथ ने हाल ही में भारत में मचे ड्यूक गेंद के हंगामे पर कहा, ‘‘मैं ने देखा है कि कुछ खिलाड़ी एसजी गेंद की शिकायत कर रहे हैं. ठीक उसी तरह कूकाबुरा गेंद भी लोगों को निराश कर रही है. कूकाबुरा गेंद अब ऐसी बनती है कि वह लंबे समय तक सख्त नहीं बनी रहती और इस के चलते वह ज्यादा समय तक स्विंग नहीं हो पाती.

‘‘टैस्ट क्रिकेट अब ड्रा से अपने वजूद को नहीं बचा सकता. टैस्ट क्रिकेट में नतीजे आएं, इस के लिए जरूरी है कि गेंद में स्विंग और स्पिन बनी रहे. गेंद में हमेशा ऐसा कुछ रहना चाहिए, जिस से वह हवा में भी हरकत करती रहे.

‘‘बल्ले और गेंद के बीच एक तरह की होड़ बनी रहने पर ही टैस्ट क्रिकेट का वजूद बना रह सकता है.

‘‘टैस्ट क्रिकेट कमजोर टीमों की पोल खोल कर रख देता है. 30 गेंदों में 70 रन बना कर आप क्रिकेट के छोटे फौर्मैट में तो जीत सकते हैं लेकिन टैस्ट क्रिकेट में नहीं. यहां एक अलग ढंग की चुनौती होती है.’’

टैस्ट क्रिकेट के रोमांच में आ रही कमी को ले कर उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस की अहम वजह यह भी है कि हम ने कुछ शानदार टीमों को खो दिया है. मैं मानता हूं कि क्रिकेट के सभी फौर्मैट में बराबर की चुनौती रहनी चाहिए, तभी यह खेल अपना वजूद बनाए रह सकता है.’’

कितनी तरह की गेंदें होती हैं इस्तेमाल

दरअसल, टैस्ट क्रिकेट में 3 तरह की गेंदों का इस्तेमाल होता है, एसजी गेंद, कूकाबुरा गेंद और ड्यूक गेंद. एसजी गेंद का इस्तेमाल सिर्फ भारत में होता है. इसे हाथों से बनाया जाता है जो अपनी शानदार सीम के लिए जानी जाती है.

इस की एक क्वालिटी यह होती है कि यह स्पिन गेंदबाज को ड्रिफ्ट कराने में मदद करती है. इतना ही नहीं, यह तेज गेंदबाज को रिवर्स स्विंग भी कराती है.

कूकाबुरा गेंद को मशीन से बनाया जाता है पर इस की सीम जल्दी फेड पड़ जाती है और इस गेंद पर ग्रिप बनाए रखना बड़ा मुश्किल काम है. हां, यह गेंद लैग स्पिनर्स के लिए मददगार है.

कूकाबुरा गेंद का इस्तेमाल आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, श्रीलंका और जिंबाब्वे में होता है.

तीसरी तरह की ड्यूक गेंद का इस्तेमाल इंगलैंड और वैस्टइंडीज में होता है. इस गेंद को भी हाथों से बनाया जाता है. इस की सीम लंबे समय तक ठीक रहती है और यह ज्यादा देर तक कठोर बनी रहती है. यह गेंद हर तरह के गेंदबाज के लिए मददगार है.

कोहली की पसंदीदा गेंद

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली एसजी गेंद से ज्यादा ड्यूक गेंद को पसंद करते हैं. उन का मानना है कि एसजी गेंद अब पहले जैसी नहीं रही है. इस की क्वालिटी भी अब पहले जैसी नहीं रही है बल्कि खराब ही हुई है. वे इस गेंद के बजाय ड्यूक गेंद को टैस्ट मैचों के लिए बढि़या मानते हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव ने भी यह बयान दिया था कि अब एसजी यानी सैंसपरील्स ग्रीनलैंड्स गेंद गेंदबाजी के लिए माकूल नहीं रह गई है.

भारतीय क्रिकेट में इस गेंद का इस्तेमाल तकरीबन 25 साल से हो रहा है. इसी गेंद से देशभर में घरेलू और इंटरनैशनल क्रिकेट खेला जा रहा है, लेकिन अब अचानक से कुछ खिलाड़ी जैसे उमेश यादव, कुलदीप यादव, रविचंद्रन अश्विन और विराट कोहली इस गेंद से नाराज दिख रहे हैं और वे मानते हैं कि इंगलैंड में बनी ड्यूक गेंद से ही टैस्ट क्रिकेट खेला जाना चाहिए.

अजहर हुए नाराज

भारतीय टीम के खिलाडि़यों की एसजी गेंद से हुई नाराजगी पर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके मोहम्मद अजहरुद्दीन कहते हैं, ‘‘मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि अचानक एसजी गेंद को ले कर इतना होहल्ला क्यों हो रहा है. मुझे अब भी वे साल अच्छे से याद हैं जब साल 1984-85 में भारत में ड्यूक की गेंदें इस्तेमाल होती थीं और उन की सीम खराब हो जाया करती थी. यह साफ था कि भारतीय हालात में ड्यूक गेंद नहीं चल सकती. इस के बाद 1993 का वह साल था, जब भारत में एसजी गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू हुआ और इस के बाद टीम इंडिया ने अपने घर पर खेले जाने वाले क्रिकेट पर अपना दबदबा बना लिया.

‘‘गेंद पर शोर मचाने से पहले दुनिया के सभी गेंदबाजों का अलगअलग गेंदों से अलगअलग हालात में गेंदबाजी का औसत देख लीजिए. इस से आप को सही जवाब मिल जाएगा. तो इसे ले कर इतना हंगामा करने की क्या जरूरत है.

‘‘जब हमारे देश के स्पिन गेंदबाज आस्ट्रेलिया जाते हैं तो उन्हें कूकाबुरा गेंद पर अपनी पकड़ बनाने में मुश्किलें आती हैं. आप को घरेलू टैस्ट सीरीज में वही गेंद इस्तेमाल करनी चाहिए, जो आप के हालात के माकूल हो. यही टैस्ट क्रिकेट की चुनौती है.’’

गेंद पर मचे इस घमासान पर क्या फैसला लिया जाता है, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा, पर फिलहाल तो यह छोटी सी लाल गेंद भारतीय खिलाडि़यों को लालपीला कर रही है.

Tags:
COMMENT