मार्च का महीना होली को होता है. होली रंगों का त्योहार है. राजनीति में नेताओं के संबंध मेल मिलाप पर भी सियासत का रंग दिखता है. उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव की शादी राजलक्ष्मी के साथ बडी धूमधम से सैफई में सम्पन्न हुई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी सांसद पत्नी डिंपल यादव, समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और अमर सिंह जैसे बडे लोग शादी में शरीक हुये. मुलायम सिंह यादव अपने छोटे भाई शिवपाल यादव को बहुत मान और सम्मान देते है. इटावा के सैफई गांव में हुई इस शादी की तुलना कुछ समय पहले मुलायम परिवार के तेज प्रताप यादव की शादी से की जा रही है. जिसमें इस शादी का रंग फीका दिख रहा है.

तेज प्रताप की शादी में प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर देश के बडे बडे नेताओं और अभिनेताओं को मुलायम परिवार की ओर से बुलावा भेजा गया था. सभी लोगों ने पूरा समय देकर तेज प्रताप की शादी में दावत का स्वाद लिया था. जब आदित्य यादव की शादी तय हुई और सैफई में शादी का आयोजन शुरू हुआ तो लोगों को उम्मीद थी कि एक बार फिर से प्रधनमंत्री से लेकर दूसरे प्रमुख नेता और अभिनेता सैफई आयेगे. सैफई में सियासी जमघट का जो रंग देखने को नहीं मिला, मुलायम परिवार उसकी कमी 13 मार्च को लखनऊ में पूरा करने की कोशिश में है. उस दिन जनेश्वर मिश्रा पार्क में आदित्य की शादी का रिसेप्शन दिया जा रहा है.

आदित्य की शादी उत्तर प्रदेश के विधनसभा चुनाव से पहले हुई. ऐसे में विरोधी दलों के नेताओं का शादी की दावत में शामिल होना वोट बैंक की राजनीति से मुफीद नहीं लग रहा था. आज का दौर सोशल मीडिया का दौर है, जहां हंसते मुस्कराते फोटो के वायरल होते देर नहीं लगती. लिहाजा दोनो ही तरफ से दूरी बरती गई. उत्तर प्रदेश की राजनीति में नेताओं के आपसी संबंधें को वोट बैंक से जोड कर देखने का रिवाज है. यही वजह है कि कभी समाजवादी नेता मुलायम और बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती एक मंच पर नहीं दिखे.

मायावती के प्रति सपा नेताओं के मन में बने भाव शहद में डूबे तीर की तरह समय समय पर निकलते रहते है. सपा प्रदेश में अपना मुकाबला भाजपा के साथ ही दिखाना चाहती है, ऐसे में भाजपा के बडे नेताओं के साथ हंसीखुशी के पल बांटना नुकसानदायक न हो जाय, इसलिये सैफई में पहले जैसा माहौल नहीं दिखा. 2014 के लोकसभा चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव के पहले मुलायम विपक्षी दलों की धुरी बनते दिख रहे थे, वह माहौल भी बदल चुका है. इन सब सियासी रंगों ने सैफई में हुई शादी के रंग को पफीका कर दिया.