गायक सोनू निगम द्वारा अजान की आवाज से दुखी होकर कराये गए मुंडन का बवाल अभी थमा ही था कि गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी मुंडन करा डाला. हार्दिक के मुंडन की वजह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय गुजरात दौरे का विरोध है. सोनू निगम के मुंडन के मुकाबले हार्दिक के मुंडन को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली, क्योंकि यह किसी धर्म या उसके पाखंड से ताल्लुक रखता हुआ नहीं था, इसके बाद भी उनकी धमक बरकरार है.

हार्दिक को समझ आ रहा है कि अगर पटेल–पाटीदार समुदाय को आरक्षण दिलाना है तो उन्हें सक्रिय राजनीति में पांव रखना ही पड़ेगा और इस बाबत वे साफ कह भी चुके हैं कि अगर गुजरात में भाजपा को हराने कांग्रेस में जाना पड़ा तो जाऊंगा. हार्दिक पटेल की जमीनी पकड़ और लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे उन्हें गुजरात का मुख्य मंत्री पेश करने की पेशकश कर चुके हैं, यानि मोदी विरोधी हर दल और व्यक्ति या नेता हार्दिक में संभावनाएं देख रहा है तो कुछ तो बात इस युवा पटेल नेता में है.

पाटीदार अनामत आंदोलन के बैनर तले हार्दिक ने बोटाद में उसी जगह मुंडन कराया जहां मोदी पिछली दफा आए थे. हार्दिक अब सियासी ड्रामेबाजी के साथ साथ परिपक्व भी हो रहे हैं, इसलिए अपने अर्ध घुंघराले केश समारोह पूर्वक मुड़वाने के बाद उन्होंने मोदी को दूसरों की तरह सीधे फेंकू न कहते यह कहा कि प्रधान मंत्री सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करते हैं, जबकि सच्चाई कुछ और होती है. इस का उदाहरण भी हार्दिक ने दिया कि जिस सोनी योजना की शुरुआत पीएम ने एक महीना पहले की थी, उसी योजना में आज पानी नहीं है.

साफ दिख रहा है कि हार्दिक पटेल नाम की चुनौती से निबटना भाजपा और मोदी दोनों के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन मोदी के पास इसका भी मंत्र है जिसे वे गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले पढ़ भी सकते हैं. यह मंत्र है हार्दिक पटेल और उनके आंदोलन की बातें, मांगें और शर्तें मान लेना इससे हार्दिक के पास फिर कहने या करने कुछ नहीं रह जाएगा और सारी क्रेडिट नरेंद्र मोदी बटोर ले जाएंगे.

यह आइडिया त्रेता युग का है कि जीतना है तो ताकतवर को गले लगा लो या दुश्मन के दुश्मन से हाथ मिला लो जैसा कि राम ने सुग्रीव और विभीषण के मामले में किया था. तब तक हार्दिक पटेल मुंडन कराएं या दूसरे किसी तरीके से अपने समुदाय के हित की बात कहें, मोदी की सेहत पर कोई असर पड़ेगा ऐसा लग नहीं रहा.