अखिलेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे अधिक चर्चा का विषय गायत्री प्रजापति का बर्खास्त और बहाल होना था. मंत्री पद पर बहाल होने के बाद जिस तरह से गायत्री ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पैर छुये, वो अलग सीन बन गया था. पैर छूने के विषय में गायत्री ने कहा ‘मुलायम और अखिलेश जमीन से जुडे नेता हैं. उन तक पहुंचना सरल है. देश में ऐसे नेता भी हैं जो मंच पर केवल अपने लिये ही कुर्सी रखते हैं. कुछ बड़े नेता आम कार्यकर्ताओं से इतनी दूरी रखते हैं कि उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.’ राजनीति में पैर छूने की संस्कृति नई नहीं है. अलग अलग समय पर अलग अलग नेता चर्चा में रहे हैं. नेताओं को खुश करने के लिये हर उपाय लोग करते हैं.

समझने वाली बात यह थी कि गायत्री प्रजापति कैसे बर्खास्त किये गये थे? गायत्री प्रजापति को हटाने का मुद्दा जब विवादों में आया, मीडिया ने सवाल किया तो हर बार मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री को हटाने की जानकारी नेता जी को थी. बात यह उठती थी कि अगर नेता जी यानि मुलायम सिंह यादव के कहने पर जब गायत्री हटाये गये, तो नेता जी दोबारा उनको मंत्री बनाने के लिये क्यों कह रहे हैं? मुख्यमंत्री इस बात को हमेशा टाल जाते थे. समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि नेता जी और मुख्यमंत्री जी के बीच बातचीत के दौरान गलत फहमी हो गई थी जिसकी बजह से गायत्री बर्खास्त हो गये थे.

घटना क्रम कुछ इस तरह था कि मुख्यमंत्री और नेताजी के बीच टेलीफोन पर बातचीत हो रही थी. जिसमें गायत्री की बात आई. नेता जी ने कहा कि गायत्री का विभाग बदल दो. मुख्यमंत्री जी को यह समझ आया कि नेताजी कह रहे है कि गायत्री को निकाल दो. ‘बदल दो’ और ‘निकाल दो’ की गलत फहमी में गायत्री बर्खास्त कर दिये गये. बर्खास्त करने के बाद कुछ ही देर में उनको वापस मंत्रिमंडल में शामिल करना मुश्किल था.ऐसे में समय का इंतजार जरूरी था.